मुहर्रम पर मातम मनाते शिया संप्रदाय के लोग
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मुहर्रम पर अंजुमने हैदरी संस्था ने घंटाकरण चौराहे पर मातम मनाया। करीब एक घंटे तक नौजवानों ने ब्लेड और जंजीरों से खुद को लहूलुहान कर दिया। बुधवार सुबह अंजुमने हैदरी के सदस्य खड़कोट स्थित इमामबाड़े में एकत्र हुए। वहां से नौता पढ़ते हुए घंटाकरण में लियाकत खान के आवास तक गए। बाद में जुलूस घंटाकरण चौराहा पहुंचा। वहां पर रौंगटे खड़े करने वाला मातम हुआ।
शिया संप्रदाय के लोग मुहर्रम पर मातम मनाते हैं। बाद में जुलूस खड़कोट स्थित इमामबाड़े पहुंचा। वहां पर मौलाना सालिम हसनैन नकवी ने संस्था को खिताब दिया। बाद में देश में अमन और खुशहाली की कामना की गई। मातमी जुलूस में यूसुफ खान, इब्राहिम खान, याकूब खान, गुलाम हुसैन, रजब अली आदि ने व्यवस्था देखी। शांति व्यवस्था के लिए कोतवाल ध्यान सिंह के नेतृत्व में पुलिस तैनात रही।
सुन्नी संप्रदाय ने ताजिए घुमाए
मुहर्रम पर सुन्नी संप्रदाय के लोगों ने नगर में ताजिए घुमाए। शाम के समय ताजिए इमामबाड़े से लाकर नया बाजार, बस स्टेशन होते हुए नगर के अन्य हिस्सों में घुमाए। इस दौरान जगह-जगह सबील का आयोजन हुआ और ताजिएदारों को चाय, पानी, शर्बत पिलाया गया। ताजिएदारों के भोजन की भी व्यवस्था की गई। इमाम हसन हुसैन की याद में यह ताजिए रात में कर्बला में दफना दिए गए। इस दौरान भारी संख्या में लोग शामिल हुए।