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मसमोली गांव से गए 60, रह गए 10 परिवार

Mon, 12 Sep 2016 10:32 PM IST
महेंद्र जंगपांगी/अमर उजाला, थल
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मस्मोली गांव में खाली पड़ा आलीशान मकान - फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला की ‘खाली होते पहाड़’ पड़ताल के दौरान गांवों के जो हालात सामने आ रहे हैं, उससे साफ हो रहा है कि पहाड़ बचाने, पलायन रोकने के नाम पर केवल कोरी बयानबाजी हो रही है। असुविधाओं की मार से खाली होते गांवों में थल का मसमोली भी शामिल हो गया है। 70 परिवार वाले मसमोली में अब केवल 10 परिवार रह गए हैं। वर्ष 2001 में गांव मोटर सड़क से जुड़ा, लेकिन अन्य सुविधाओं के अभाव में लोगों का गांव से जाने का सिलसिला जारी रहा।
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30 साल पहले से ही मसमोली गांव खाली होने लगा था। वर्ष 1986 में सबसे पहले शिक्षक हरीश चंद्र जोशी के परिवार ने गांव छोड़ा। यह परिवार लखनऊ बस गया। 1991 में श्रीनिवास जोशी का परिवार नाइजीरिया चला गया। 20 साल पहले भुवन चंद्र जोशी अमेरिका, 18 वर्ष पहले चंद्रमोहन जोशी हल्द्वानी, 15 साल पहले हेम जोशी मुंबई जाकर बस गए।

इसके बाद विनोद जोशी, विमल जोशी, हेम चंद्र जोशी, नेत्र बल्लभ जोशी समेत कई परिवार गांव से चल दिए। यह सिलसिला अब भी जारी है। गांव खाली होने के पीछे बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा का न होना, रोजगार के साधनों का अभाव कारण है। खाली होते गांव पहाड़ के अस्तित्व के साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा हैं।
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गांव की यह दशा देखी नहीं जाती
मसमोली में रह रहे रिटायर्ड शिक्षक हरीश चंद्र जोशी (85), रिटायर्ड शिक्षक मोहन चंद्र जोशी (70), पूर्व सैनिक देवकीनंदन जोशी (65), रिटायर्ड शिक्षक हीरा बल्लभ जोशी (68) कहते हैं कि गांव की यह दशा देख नहीं जाती। गांव लगातार खाली होता जा रहा है। सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा, रोजगार उपलब्ध नहीं करा रही है। सड़क में 15 साल बाद भी डामर नहीं है। बरसात में सड़क बंद रहती है। ऐसे में इन गांवों में कौन रहेगा।
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