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दो महीने से सड़क बंद, मुसीबत बढ़ी

Mon, 12 Sep 2016 10:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झूलाघाट
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सड़क बंद होने से मरीज को डोली पर लाते लोग - फोटो : अमर उजाला
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काली नदी के किनारे बसे लोगों की कोई सुनने वाला नहीं है। यहां के दर्जनों गांवों के लोग सड़क बंद होने से पिछले 2 महीने से भारी संकट में हैं। गांवों तक रसोईगैस सिलेंडर, अन्य जरूरी सामान ले जाने में भारी दिक्कत आ रही है। जगह-जगह मलबा पटने से सड़क चलने लायक नहीं है। मरीजों को इसी मलबे के ऊपर से डोली पर बैठाकर लाना पड़ रहा है। सड़क पर कई स्थानों पर भूस्खलन का खतरा बना है। पहाड़ी से गिरने वाले पत्थर गंभीर खतरा बने हैं। अब गांव के लोगों ने चेतावनी दी है कि एक सप्ताह में सड़क सही नहीं हुई तो झूलाघाट-पिथौरागढ मार्ग पर जाम लगाया जाएगा।
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दो माह पहले छह किलोमीटर लंबी झूलाघाट से बलतड़ी तक की इस सड़क पर बारिश के साथ ही कई जगह मलबा पट गया था। इसके बाद से यह सड़क बंद है। लंबा समय बीतने बाद अब तक लोक निर्माण विभाग इस सड़क को नहीं खोल पाया है। नतीजतन नेपाल सीमा से लगे काली नदी के किनारे के बलतड़ी, तड़ीगांव, ताकुला, मनानीगाड़, बोनकोट और जायल गांवों के लोग भारी परेशानी में हैं। मरीजों को अस्पताल ले जाने में भारी परेशानी हो रही है। सामाजिक कार्यकर्ता खीमानंद भट्ट ने बताया कि गांव की सड़क बंद होने से यहां के लोगों को 4 किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है। 

अब लोगों ने लोक निर्माण विभाग के खिलाफ आंदोलन का मन बना लिया है। 7 दिनों के भीतर विभाग द्वारा सड़क नहीं खोली जाती तो इन गांवों के लोग सड़क को जाम कर देंगे। मूनाकोट के पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख खीमराज जोशी ने सड़क के बंद होने की सूचना पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता नवीन जोशी को दे दी है। ईई ने कहा कि सड़क की खराब स्थिति की जानकारी ली गई है। जल्द ही सड़क से मलबा हटाने का काम किया जाएगा।
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