नंदा चोटी में पहुंचे पर्वतारोही।
- फोटो : अमर उजाला
आइस संस्था के पर्वतारोही मनीष कसनियाल और ब्रिटिश पर्वतारोही जॉन जेम्स कुक ने नंदा लपाक (5782 मीटर ऊंची) को पश्चिमी छोर से फतह करने में कामयाबी हासिल की है। पश्चिमी छोर से पहली बार पर्वतारोहियों ने यह चोटी फतह की है। इससे पहले वर्ष 2009 में इंग्लैंड के मार्टिन मोरन ने दक्षिणी छोर से नंदा लपाक चोटी को फतह किया था।
13 अक्तूबर को तड़के तीन बजे मनीष और इंग्लैंड के पर्वतारोही जॉन जेम्स कुक पर्वतारोहण अभियान में निकले और सुबह 10 बजेे उन्होंने चोटी को फतह किया। मनीष ने नंदा लपाक पर देश के साथ ही रेडक्रॉस का झंडा फहराया। एलएसएम राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में एमए फर्स्ट सेमेस्टर के इतिहास के छात्र मनीष ने कुमाऊं विश्वविद्यालय का बैनर भी चोटी पर फहराया। मनीष ने बताया कि यह चोटी नंदा देवी ईस्ट पर्वत के पांच हजार मीटर से करीब पांच किमी खड़ी चढ़ाई तक नंदा लपाक पर्वत (5782 मीटर) पर दोनों पर्वतों को जोड़ती है। इस चोटी के एक तरफ चट्टान और दूसरी तरफ कोने हैं।
इस पर चलना जान जोखिम में डालना है। धार के सीधे दूसरी तरफ खड़ी ढलान है। यहां बर्फीली हवाओं का सामना करना पड़ता है। साथ ही साढ़े पांच हजार मीटर की ऊंचाई पर चट्टान चढ़कर जाना होता है। उन्होंने बताया कि अंत में नंदा लपाक पर्वत से 200 मीटर ठीक नीचे बर्फीली दीवार पर चढ़कर जाना पड़ता है। पर्वतारोही जेम्स ने बताया कि मनीष के साथ अभियान सफल रहा। मनीष ने सीमांत जनपद को पर्वतारोहण के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई है।
वासुदेव धार नाम दिया
पिथौरागढ़। पश्चिमी चोटी के साथ नंदा लपाक पर्वत के सफल आरोहण के बाद कुक और मनीष ने इस धार को वासुदेव धार नाम दिया है। उन्होंने बताया कि धार को मनीष के साहसिक खेलों के गुरु विश्वदेव पांडेय (वासु) के नाम समर्पित करेंगे। मनीष ने कहा कि आइस संस्था के वासु ने सीमांत जिले के युवाओं को साहसिक खेलों में आगे बढ़ाने के लिए काफी मेहनत की है।