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Pithoragarh News: फलों के बाजार में पहचान बना रहा पहाड़ का केला

Mon, 18 Sep 2023 10:16 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
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पिथौरागढ़। पहाड़ में भी केले की खेती फायदेमंद साबित हो रही है। पिथौरागढ़ जिले में उत्पादित होने वाला मालभोग और बसराई प्रजाति का केला फलों के बाजार में अपनी जगह बना रहा है। स्वाद और सेहत के लिहाज से अच्छा माना जाने वाला पहाड़ी केला लोग हाथों-हाथ खरीद लेते हैं। जिले में वर्तमान में लगभग 1200 से अधिक परिवारों की आजीविका केले की खेती से चल रही है।
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पिथौरागढ़ जिले के घाटी वाले गर्म इलाकों में लोग केले की खेती करते आ रहे हैं। इनमें मालभोग या बसराई प्रजाति का केला शामिल है लेकिन केले की खेती पहले व्यावसायिक नहीं बन पाई। सबसे अधिक केला बंदरलीमा, बगड़ीहाट और पीपली क्षेत्र में होता है। घाटी वाले क्षेत्र सड़क मार्ग से नहीं जुड़ने के कारण पहले केला बाजार तक नहीं पहुंच पाता था।
हाल के वर्षों में जिले के कई घाटी वाले क्षेत्रों तक सड़क सुविधा पहुंच गई है। इससे किसान अपने उत्पाद को सीधे बाजार तक पहुंचा पा रहे हैं। पिथौरागढ़ बाजार की लगभग 40 प्रतिशत सब्जी की दुकानों में पहाड़ का केला उपलब्ध रहता है।
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सब्जी व्यवसायी जगदीश ने बताया कि दुकान में यदि पहाड़ी केला उपलब्ध रहता है तो ग्राहक पहले उसी केले की मांग करता है। लोग कैमिकल में पकाने के बजाय परंपरागत तरीके से पकाते हैं। इस केले की बिक्री भी 50 से 60 रुपये दर्जन के हिसाब से आसानी से हो जाती है। संवाद

बर्मा से लाया गया था मालभोग केला
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़-धारचूला एनएच के किनारे बसा बंदरलीमा गांव मालभोग केला उत्पादन के लिए जाना जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 1944 में गांव के तारा दत्त भट्ट बर्मा से मालभोग केले के पेड़ लाए थे। केले की इस प्रजाति को यहां की मिट्टी ऐसी रास आई कि यह गांव के लोगों का रोजगार का जरिया बन गया। वर्तमान में गांव में लगभग 25 परिवार रहते हैं।
केला बेचकर गांव में रहने वाला हर परिवार लगभग छह से सात हजार रुपये महीने की आमदनी कर लेता है। इसी तरह से बगड़ीहाट क्षेत्र में भी केला उत्पादन रोजगार का अच्छा जरिया बना है। मालभोग केला तमाम औषधीय गुणों से भरपूर होता है। गांव के लोग आज भी तमाम बीमारियों में मालभोग का ही प्रयोग करते हैं। संवाद
कोट

केला उत्पादन के लिए पहाड़ के घाटी वाली जमीन उपयुक्त है। यदि कोई किसान केले की खेती का प्रशिक्षण प्राप्त करना चाहता है तो उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा। - डाॅ. अभिषेक बहुगुणा, वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र पिथौरागढ़।
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