पिथौरागढ़। 12 अक्तूबर 2023 को आदि कैलाश से लौटकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब पिथौरागढ़ के स्पोर्ट्स स्टेडियम में जनसभा को संबोधित किया था तब उन्होंने कहा था कि अभी से तैयारियां कर लो, इतनी भीड़ आएगी कि संभाले नहीं संभलेगी। प्रधानमंत्री की यह बात सच साबित हुई है। सीजन की शुरुआत में ही लगभग 60 हजार से अधिक पर्यटक पिथौरागढ़ जिले में पहुंच चुके हैं। इनमें आदि कैलाश और ओम पर्वत दर्शन के लिए आने वाले पर्यटकों की संख्या 10 हजार पार हो गई है।
उत्तराखंड के गढ़वाल में चार धाम यात्रा पर हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री, बदरीनाथ के कपाट खुलते ही लाखों श्रद्धालु इन पवित्र धामों के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कुमाऊं में जागेश्वर धाम, पाताल भुवनेश्वर गुफा, आदि कैलाश और ओम पर्वत स्थित होने के बावजूद यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पिछले साल तक सीमित रहती थी। केएमवीएन की ओर से संचालित आदि कैलाश यात्रियों का आंकड़ा एक हजार से 1500 तक ही सिमट जाता था।
2020 तक कुमाऊं से होकर संचालित होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा भी यहां के लोगों के लिए व्यवसाय के लिहाज से प्रत्यक्ष रूप से फायदेमंद नहीं रही। पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदि कैलाश का दौरा करने के बाद चमत्कारिक रूप से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिला है। स्थिति यह है कि पिथौरागढ़ से लेकर ज्योलिंगकांग तक होटल और होम स्टे पैक हैं। मई की शुरुआत में पर्यटकों को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को इनर लाइन परमिट की अवधि पंद्रह दिन से घटाकर चार दिन करनी पड़ी थी। टैक्सी संचालकों के अलावा इस रूट पर लगभग 250 किलोमीटर तक रेस्टोरेंट, ढाबा संचालकों की अच्छी आमदनी हो रही है। ऑनलाइन परमिट से सरकार को भी अब तक लगभग 30 लाख से अधिक का राजस्व मिल चुका है।
चार धाम की तरह मानसखंड में सुविधाएं बढ़ाने से आने वाले वर्षों में यहां का धार्मिक पर्यटन और अधिक बढ़ने की संभावना है। पिथौरागढ़ होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र भट्ट का कहना है कि आदि कैलाश यात्रा से पिथौरागढ़ जिले का पर्यटन कारोबार बढ़ा है। पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी से पूरे कुमाऊं को फायदा मिलेगा। संवाद
..........इनसेट.........
ऐसा लगता है जैसे हर जगह महादेव बैठे हैं
पिथौरागढ़। आदि कैलाश के दर्शन के लिए बस, टैक्सी और निजी वाहनों से ही नहीं बल्कि दोपहिया वाहनों से भी प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पश्चिम बंगाल से आए सौरभ चक्रवर्ती, संतू दास, रूबी दास ने बताया कि आदि कैलाश, पार्वती सरोवर, गौरी कुंड, कालापानी, ओम पर्वत देखकर वह अभिभूत हैं। ऐसा लगता है जैसे यहां हर जगह महादेव बैठे हैं। उन्होंने कहा कि सबको एक बार जरूर यहां आना चाहिए। संवाद