जिला मुख्यालय के रामलीला सदर और टकाना की रामलीला में तृतीय दिवस पर धनुष यज्ञ का मंचन किया गया। परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने दर्शकों का मन मोह लिया। तृतीय दिवस की रामलीला की शुरुआत सीता स्वयंबर से हुई। जनक दरबार में बंदीजन राजाओं को राजा जनक के प्रण की जानकारी देते हैं। कई राजा धनुष को तोड़ना तो दूर उसे हिला तक नहीं पाए।
राजाओं के नाकाम रहने पर राजा जनक राजाओं को उलाहना देते हैं। धरती को वीरों से विहीन बताते हैं। यह बात शेषावतार लक्ष्मण सहन नहीं कर पाते। लक्ष्मण कहते हैं-कही जनक जस अनुचित वाणी, कुल को दाग लगाता है। कंदुक इव ब्रह्मांड उठाऊ मेरे मन यह आता है। भगवान राम लक्ष्मण के गुस्से को शांत करते हुए कहते हैं-जनक की बातें योग्य न समझो, नहीं पहचाना है, हमको। कभी फूल खिलते हैं वृक्ष पर कभी पतझड़ कहलाता है।
इसके पश्चात महर्षि विश्वामित्र के आदेश पर भगवान राम धनुष को तोड़ने आगे बढ़ते हैं। प्रत्यंचा चढ़ाने के दौरान धनुष टूट जाता है। धनुष टूटने की आवाज सुनकर भगवान परशुराम राज दरबार में आ पहुंचते हैं। धनुष टूटा देख बेहद क्रोधित परशुराम का लक्ष्मण प्रतिरोध करते हैं तो परशुराम कह उठते हैं-बालक छोटा बड़ा है खोटा, थोड़ा है नादान। लक्ष्मण कहते हैं-बार-बार मोहे परशु दिखाकर क्यों करते अभिमाना, जो कायर तुम्हें मिले मुनी जी, उन्हीं को तुम जा धमकाना। भगवान राम से संवाद के दौरान परशुराम उन्हें पहचान जाते हैं और कैलास की ओर चल देते हैं।
थल की रामलीला में धनुष यज्ञ से परशुराम लक्ष्मण संवाद तक की लीला का मंचन किया गया। गंगोलीहाट की रामलीला में भी धनुष यज्ञ, परशुराम-लक्ष्मण शक्ति का मंचन किया गया। मुख्य अतिथि कांग्रेस के प्रदेश महासचिव पिथौरागढ़ के पालिकाध्यक्ष जगत सिंह खाती थे।
कनालीछीना में रामलीला आज से
कनालीछीना। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष मनोज बिष्ट ने कहा कि कनालीछीना की रामलीला का 80वां मंचन बुधवार से किया जाएगा। क्षेत्र के बुजुर्ग गोपाल सिंह सिरोला ने बताया कि रामलीला का पहला मंचन वर्ष 1936 में हुआ था।
पुलिस ने चलाया जागरूकता अभियान
पिथौरागढ़। पुलिस ने जिला मुख्यालय की रामलीला में किराएदारों का सत्यापन कराने के साथ ही यातायात नियमों का पालन करने के लिए लोगों को प्रेरित किया। पुलिस अधीक्षक अजय जोशी ने बताया कि पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर चलाया गया अभियान रामलीला की समाप्ति तक जारी रहेगा।