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एक घंटे तक रुक गया नदी का प्रवाह

Tue, 04 Oct 2016 10:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नाचनी
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मलबा पटने से कुछ देर के लिए रुका रामगंगा का प्रवाह - फोटो : अमर उजाला
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ऊपरी रामगंगा घाटी के नाचनी से लेकर तेजम तक के इलाके में मंगलवार की सुबह सात बजे से डेढ़ घंटे तक हुई भारी बारिश के दौरान एक बार फिर हरड़िया नाला उफान पर आ गया। हरड़िया नाले के साथ बहकर आया कई टन मलबा सुबह करीब आठ बजे रामगंगा में समा गया। इस कारण रामगंगा में झील बन गई और करीब एक घंटे तक नदी का प्रवाह थम गया।
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अचानक मौसम में आए बदलाव और नदी का प्रवाह रुकने से लोग भारी दहशत में आ गए। हालांकि एक घंटे बाद रामगंगा में बनी झील का पानी खुद ही हटने लगा। वहीं, रामगंगा में झील बनने की सूचना पर नाचनी के थाना प्रभारी महेश कांडपाल के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची और थल थाना पुलिस को भी अलर्ट कर दिया गया। वन विकास निगम के अध्यक्ष हरीश धामी ने इस मामले की जानकारी प्रभारी जिलाधिकारी आशीष कुमार चौहान को दी। साथ ही सिंचाई विभाग के अधिकारियों से भी सचेत रहने को कहा। बाद में झील का पानी खुद ही हटने से लोगों ने राहत की सांस ली।

सुबह सात बजे से इलाके में मूसलाधार बारिश होने लगी, इससे हरड़िया नाले का कटाव तेज हो गया और वह अपने साथ भारी मात्रा में मलबा बहाकर ले आया। यह मलबा रामगंगा में उसी स्थान पर डंप हो गया, जहां पर 2014 में भी मलबा गिरा था। नदी में इस समय पानी की मात्रा कम है। यदि नदी में प्रवाह तेज होता तो मलबा रुक नहीं पाता। रामगंगा का प्रवाह रुकने की जानकारी मिलते ही नाचनी बाजार समेत थल आदि कस्बों में लोग दहशत में आ गए। यह आशंका जताई जाने लगी कि यदि झील का पानी एक साथ निकला तो निचले इलाकों में तबाही मच सकती है। करीब एक घंटे बाद मलबा धीरे-धीरे बहने लगा और नदी में बनी झील समाप्त हो गई। 
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रामगंगा में इस समय 1800 क्यूसेक पानी
सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता हेम चंद्र उपाध्याय ने बताया कि रामगंगा में इस समय मात्र 1800 क्यूसेक पानी है। नदी अपने न्यूनतम स्तर की ओर बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि मानसून सीजन में कई बार नदी का पानी 40 हजार क्यूसेक तक मापा गया था। उन्होंने कहा कि नदी का प्रवाह कम होने के कारण खतरे की कोई आशंका नहीं है।

नमी के कारण तैयार हुआ सिस्टम
मौसम विभाग का कहना है कि इस समय नमी के कारण स्थानीय स्तर पर सिस्टम सक्रिय हो जाते हैं। दिन में गर्मी का असर ज्यादा रहने से भी अचानक बारिश की संभावना बनती है। अक्तूबर में खंडवृष्टि की संभावना ज्यादा रहती है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी डा. आरएस राणा ने कहा है कि अभी लोगों को कुछ दिनों तक सजग रहने की जरूरत है।
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