पिथौरागढ़। अपने एक-एक विधायक की गिनती कर रही कांग्रेस इस वक्त किसी भी विधायक को नाराज नहीं करना चाहती। लिहाजा, सोमवार को पिथौरागढ़ विधानसभा क्षेत्र के निर्माणाधीन 15 किमी लंबे द्यूड़ी-भनार मोटर मार्ग को पूरा कराने की मांग को लेकर कांग्रेस विधायक मयूख महर जैसे ही धरने पर बैठे सालों पुराना शासनादेश बाहर आ गया और शाम होते-होते शासन ने सड़क के अवशेष कार्य के लिए 1.51 करोड़ रुपये की स्वीकृति दे दी। इसके बाद विधायक ने धरना समाप्त कर दिया। इस दौरान धरनास्थल पर भारी पुलिस फोर्स तैनात रही।
क्षेत्रीय विधायक मयूख महर सोमवार सुबह 11 बजे समर्थकों के साथ लोनिवि कार्यालय पहुंचे और द्यूड़ी-भनार मोटर मार्ग का निर्माण पूरा कराने के लिए धरने में बैठ गए। विधायक ने कहा कि शासन ने सड़क निर्माण के लिए वर्ष 2000 में शासनादेश जारी हुआ और विभाग को वर्ष 2006 में धन दिया गया। जिससे 400 मीटर लंबी सड़क बनी, लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण सड़क पूरी नहीं बन सकी। सड़क पूरी बन जाती तो करीब 6000 लोगों को इस सड़क का लाभ मिलता। यह सड़क चंडिकाघाट के तोक तुलानी समेत सीम, नैनी, भनार, द्यूड़ी, दिगतोली को जोड़ती।
जिला पंचायत अध्यक्ष प्रकाश जोशी ने विधायक महर के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि सड़क निर्माण में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश पंत ने कहा विभाग की लापरवाही के कारण कई सड़कों का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। सड़कों के निर्माण में लोनिवि लापरवाही बरत रहा है, जिसे सहन नहीं किया जाएगा। मयूख ने धरनास्थल पर चेतावनी दी यदि जल्द सड़क पूरी नहीं हुई तो वह आमरण अनशन भी करेंगे। मयूख के धरने पर बैठने क ी सूचना पर शासन में खलबली मच गई।
शाम करीब चार बजे सचिव उत्तराखंड शासन डीएस गर्ब्याल के हस्ताक्षरों से जारी जीओ विधायक, विभाग को मिला, जिसमें सड़क के अवशेष कार्य के लिए 1.51 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी गई। शासन का पत्र मिलने के बाद विधायक ने धरना समाप्त कर दिया। धरने में युवक कांग्रेस के ऋषेंद्र महर, प्रदेश प्रवक्ता भुवन पांडे, तिलक जोशी, शंकर खड़ायत, प्रदीप थापा, ललित पाल, जीवन कोहली, हीरा सिंह बिष्ट, लक्ष्मण बोरा, प्रेम पुनेड़ा, निर्मल लोहिया, पद्मा बिष्ट, अजय महर, सुरेंद्र महर, रोहन सौन, श्याम सुंदर सौन, गौरव महर, नरेंद्र सौन, नीमा सौन, सुरेश खड़ायत, ललित पाल, कुंडल महर, भरत मेहरा, वीरेंद्र गिरि थे।