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गर्मी के बढ़ने के साथ माइग्रेशन शुरू, आसान नहीं होगी माइग्रेशन राह

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मैदानी क्षेत्रों से चरावाहे अपने मवेशियों के साथ अपने मूल गांवों को लौटने लगे हैं। - फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। गर्मी बढ़ने के साथ ही मैदानी क्षेत्रों से उच्च हिमालयी क्षेत्रों के लिए प्रवास शुरू हो गया है। इस बार उच्च हिमालयी क्षेत्रों की ओरजाने की राह आसान नहीं होगी क्योंकि आपदा में धारचूला और मुनस्यारी के कई पैदल रास्ते और पुल ध्वस्त हैं। रास्तों और पुलों का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है।
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इससे प्रवासियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। निचले क्षेत्रों में गर्मी बढ़ने के साथ ही चरवाहे अपने मवेशियों के साथ उच्च हिमालयी क्षेत्रों की ओर जाने लगे हैं।
बरसात में उच्च हिमालयी क्षेत्रों के गांवों को जाने वाले अधिकतर पैदल रास्ते, पुल ध्वस्त हो गए थे। इन ध्वस्त पैदल रास्तों को नहीं सुधारा जा सका है। इस कारण आईटीबीपी भी अभी सिर्फ बुगडियार चौकी तक ही जा रही है।
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अब मुनस्यारी के तल्ला जोहार से मल्ला जोहार के लिए भी प्रवास का सिलसिला शुरू हो गया है। कहीं-कहीं पर रास्ते बर्फ से ढके हैं। इसलिए अभी सिर्फ स्थानीय लोग ही खुद बर्फ हटाकर जा रहे हैं जबकि अप्रैल से बड़ी संख्या में प्रवास होगा। इधर धारचूला के दारमा और व्यास वैली में लोगों ने प्रवास शुरू कर दिया है।
चरवाहे भी मवेशियों को लेकर मूल गांवों को लौटने लगे हैं। रास्तों को शीघ्र ठीक नहीं किया गया तो दिक्कतें हो सकती है। लोगों ने प्रशासन से पैदल रास्तों और पुलों को सुधारने की मांग की है।
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