राजस्व पुलिस की गिरफ्त में मनरेगा घोटाले के आरोपी
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विकासखंड विण के स्याला गांव में वर्ष 2008 से 2013 के बीच हुए करीब 60 लाख रुपए के मनरेगा घोटाले में तीन और लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बृहस्पतिवार को गिरफ्तार लोगों में ग्राम विकास अधिकारी, मनरेगा के रोजगार सहायक और तत्कालीन क्षेत्र पंचायत सदस्य शामिल हैं। इस मामले में पांच लोगों की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है।
एसडीएम अनुराग आर्य के निर्देश पर बृहस्पतिवार सुबह इस मामले के जांच अधिकारी यशवंत थापा, राजस्व उपनिरीक्षक प्रकाश कापड़ी और अन्य ने अलग-अलग स्थानों पर दबिश दी। उपनिरीक्षक प्रकाश कापड़ी ने बताया कि स्याला की तत्कालीन क्षेत्र पंचायत सदस्य तुलसी देवी को घंटाकरण के पास गिरफ्तार किया गया। ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) रमेश चंद्र जोशी बस स्टेशन से पकड़े गए और मनरेगा के तत्कालीन रोजगार सहायक मनोज जोशी को उनके गांव मेलडुंगरी जाकर पकड़ा गया। वीडीओ रमेश चंद्र जोशी यह प्रकरण सामने आने के बाद एक बार निलंबित हो गए थे। बाद में उनकी बहाली हो गई और उनका स्थानांतरण नैनीताल जिले में हो गया था, लेकिन मनरेगा घोटाले के दौरान वह विण विकासखंड के स्याला क्षेत्र में ही तैनात थे। इसलिए उनकी गिरफ्तारी के लिए राजस्व पुलिस लगातार प्रयास कर रही थी। सभी आरोपियों के खिलाफ धारा 420, 465, 467, 468, 471, 406, 409 और 120 बी में मुकदमा दर्ज किया गया है।
एसडीएम ने बताया कि इस मामले में अभी दो-तीन गिरफ्तारियां और होनी हैं। बताया गया कि स्याला गांव में वर्ष 2008-13 में मनरेगा की मद में भारी गड़बड़ी की गई। इस गांव को ब्लॉक कर्मचारियों की मिलीभगत से विकास के नाम पर सबसे ज्यादा धनराशि मिली। इस धनराशि को ठिकाने लगाने के लिए कर्मचारियों और पंचायत प्रतिनिधियों ने सांठ-गांठ कर ली थी। मामला प्रकाश में आने के बाद डीएम ने इसके जांच के आदेश दिए थे। एसडीएम की अध्यक्षता में गठित जांच टीम ने कई लोगों के खिलाफ आरोप पत्र तैयार किए। इस घोटाले में अब तक आठ लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।