मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) होने के बावजूद सीमांत की 94 ग्राम पंचायतों के लोगों को उपचार के लिए पिथौरागढ़ या हल्द्वानी जाना पड़ता है। कई बार गंभीर और घायल मरीजों को डोली से कई किमी की पैदल यात्रा कर सीएचसी तक लाया जाता हैं। जहां पर मात्र प्राथमिक उपचार के बाद मरीजों को हायर सेंटर ही रेफर करना पड़ता है।
आपदाग्रस्त मुनस्यारी का सीएचसी 94 ग्राम पंचायतों की आबादी के लिए सिर्फ रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। अस्पताल में डॉक्टर होने के बाद भी उपचार की विशेष सुविधा नहीं है। लाखों की एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड मशीन वर्ष 2014 से धूल फांक रहीं हैं। इनके लिए तकनीशियन का इंतजार है। अस्पताल में 14 ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर, 11 छोटे ऑक्सीजन सिलिंडर, 22 बड़े सिलिंडर उपलब्ध हैं। पैथोलॉजी में एकमात्र लैब तकनीशियन आउटसोर्स पर तैनात है। सांसद, विधायक आदि जनप्रतिनिधियों समेत जिला पंचायत सदस्य जगत मर्तोलिया ने भी लैब और अस्पताल के जरूरी सामान के लिए राशि दिलाई है। फिर भी मरीजों को बाहरी लैब के लिए जांचें लिखीं जा रहीं हैं, जबकि सामान्य जांचों के लिए लैब में सामान मौजूद है। मरीज राजेंद्र सिंह का कहना है कि उनको बुखार था। इस पर डॉक्टर ने टायफाइड जांच के लिए बाहरी लैब में भेजा। उन्होंने कहा कि सामान्य जांचें अस्पताल में होनी चाहिए पर नहीं हो रहीं हैं। यही शिकायत अन्य मरीजों की भी रहती है।
------------
29पीटीएच02 पी-
सीएचसी मुनस्यारी।
------------ डबल इनसेट और डबल कोट
2014 तक पीपीपी मोड में संचालित था सीएचसी
मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। अप्रैल 2014 तक अस्पताल पीपीपी मोड के तहत बरेली के शील नर्सिंग होम ने संचालित किया। तब विशेषज्ञों डॉक्टरों की तैनाती थी। पैथोलॉजी, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड के साथ ही समस्त स्टाफ एवं व्यवस्थाएं उपलब्ध थीं। शील नर्सिंग होम का अनुबंध पूर्ण होने के बाद न तो नवीनीकरण हुआ और न ही कोई नया टेंडर। सामाजिक कार्यकर्ता मोहन सिंह दोसाद ने कहा कि पीपीपी मोड के समय इस अस्पताल में दिन-रात डॉक्टर एवं स्टाफ मिलता था। ऐसी व्यवस्था हर हाल में बहाल होनी चाहिए। (संवाद)
---------
डॉक्टर तो हैं लेकिन उपचार नहीं
मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। सीएचसी में चिकित्साधिकारी के सभी चार पद भरे हैं। फार्मासिस्ट के तीन पदों में से एक की तैनाती है। स्टाफ नर्स के तीन पद भरे हैं। उनके साथ दो एनएचएम कर्मी भी सेवारत हैं। स्वच्छक के दो पद खाली हैं। लैब तकनीशियन आउटसोर्स से तैनात है, जबकि एक्सरे और अल्ट्रासाउंड तकनीशियन का इंतजार है। (संवाद)
----------- डबल कोट सादे
सरकार को मुनस्यारी अस्पताल में आपदा के दृष्टि से सभी सुविधाएं दुरुस्त की जानी चाहिए। आपदा की दृष्टि से सड़कें क्षतिग्रस्त हो जातीं हैं। तब मरीज चाहकर भी बाहर नहीं जा सकते हैं।
- जगत मर्तोलिया, जिला पंचायत सदस्य।
-------
सीएचसी की वर्तमान व्यवस्थाओं के मुताबिक ही कार्य किया जा रहा है। सीएचसी में खाली पदों के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
- डॉ. गौरव, चिकित्सा प्रभारी मुनस्यारी।