पांडवकाल में बना मड़ का सूर्य मंदिर लगातार खतरे से घिर रहा है। पिछले कई वर्षों से मंदिर का एक हिस्सा पूर्व दिशा की ओर झुक रहा है। अब तो स्थिति यह आ गई है कि भक्त मंदिर के मुख्य कक्ष में जाकर पूजा करने से भी डर रहे हैं। पिछले पांच साल से मंदिर एक तरफ धीरे धीरे झुक रहा है।
पुरातत्व विभाग के अधीन होने के कारण गांव के लोग अपने स्तर से सुरक्षा के कोई कदम उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इसे सुधारने में 25 लाख रुपये के खर्च का अनुमान है।
मड़ के सूर्य मंदिर को कटारमल के सूर्य मंदिर की तरह ही माना जाता है। कहते हैं कि जब पांडव स्वर्गारोहण के लिए हिमालय की ओर निकले थे, तब कुछ देर मड़ में भी रुके।
तब द्रौपदी के आग्रह पर पांडवों ने सूर्य मंदिर की स्थापना की थी। बाद में कत्यूरी राजाओं ने मंदिर का निर्माण किया था। मंदिर में सात रथों वाले भगवान सूर्य की मूर्ति है। मंदिर परिसर में भगवान विष्णु, शिव, लक्ष्मी की भी मूर्तियां हैं।
डीडीहाट से 15 किलोमीटर दूर चौबाटी कस्बे से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित मड़ गांव के इस मंदिर में कोई बड़ा मेला नहीं लगता लेकिन इस ऐतिहासिक धरोहर पर मंडरा रहे खतरे से गांव के लोग चिंतित हैं। मंदिर के पुजारी दिनेश चंद्र जोशी ने बताया कि अब लोग मुख्य कक्ष में बैठकर पूजा करने से भी डर रहे हैं।