नोटबंदी को 50 दिन पूरे हो गए हैं। इस अवधि में अकेले भारतीय स्टेट बैंक में 2.7 अरब रुपए के पुराने नोट जमा किए और बदले में उसे रिजर्व बैंक से 97 करोड़, पड़ोसी जिलों से 15 करोड़ रुपए का ही कैश मिल पाया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि करेंसी के संकट ने बाजार और कारोबार को किस तरह प्रभावित किया होगा। बैंक से इस समय सप्ताह में 24 हजार रुपए का भुगतान और एटीएम से अधिकतम 2500 रुपए की निकासी मिल पा रही है। यह राशि लोगों के घरेलू खर्चों के लिए कम पड़ रही है। डीडीहाट में अभी कैश वितरण की स्थिति ठप पड़ी है। वहां एटीएम बंद पड़े हैं।
आठ नवंबर की रात नोटबंदी का एलान होने के बाद रिजर्व बैंक ने कई बार नियम बदले। इसका परिणाम यह हुआ कि शादी-विवाह के लिए यहां किसी भी व्यक्ति को ढाई लाख रुपए की राशि नहीं मिल पाई। शुरुआत में करीब एक सप्ताह तक जिले के सभी बैंकों में कैश की भारी कमी हो गई। नए नोट आने में काफी देरी हुई। दो हजार का नोट नवंबर अंतिम सप्ताह में यहां पहुंचा, जबकि 500 का नोट लोगों को 10 दिसंबर के बाद मिल पाया। नोटबंदी के कारण फर्नीचर, टीवी, कंप्यूटर, बर्तन आदि का बाजार पूरी तरह ठप हो गया। विवाह के सीजन में भी बिक्री नहीं हो पाई। सराफा बाजार पर भी नोटबंदी की मार पड़ी। विवाह के लिए गहने बनाने का आर्डर कम हो गया।
यदि छोटे कारोबार पर नजर डाली जाए तो सब्जी और फलों की बिक्री में 30 से 40 फीसदी तक की गिरावट आ गई। यह बिक्री अब तक भी नहीं संभली है। विवाह के समय जिन बैंडवालों को अच्छा खासा काम मिलता था, उनको नवंबर में हुए लगन में दस फीसदी तक भी काम नहीं मिल पाया। सबसे बड़ा असर सरकारी ठेकेदारों, निजी निर्माण कार्यों पर पड़ा है। ठेकेदारों के पास मजदूरों को देने के लिए नकदी नहीं है। बैंक से ज्यादा निकासी न मिलने के कारण मजदूरों को भुगतान के लाले पड़ गए। कई नेपाली और बिहारी मजदूर इसी कारण यहां से जा चुके हैं।
दिसंबर प्रथम सप्ताह में पेंशन, वेतन के लिए भी मारामारी रही। बैंकों से ज्यादा भुगतान न मिलने से पेंशनर और वेतनभोगी कर्मचारी खासे परेशान रहे। बैंक के अधिकारियों का कहना है कि अब बैंकों में भीड़ तो कम है, लेकिन लोगों को जरूरत के अनुसार कैश नहीं मिल पा रहा है। स्टेट बैंक के कैश अधिकारी कन्हैया लाल का कहना है कि 30 दिसंबर के बाद संभव है कि भुगतान के संबंध में कोई नई गाइडलाइन आ जाए। उसके बाद लोगों को बैंकों से ज्यादा रकम मिलने लगेगी।
व्यापारियों का कहनाहै कि जब तक बैंकों और एटीएम से अधिक निकासी नहीं होती, बाजार की हालत सुधरने वाली नहीं है। उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष पवन कुमार जोशी का कहना है कि यदि 30 दिसंबर के बाद निकासी के नियम बदलते हैं तो नए साल में बाजार थोड़ा गति पकड़ने लगेगा। वहीं, एसबीआई डीडीहाट में बुधवार को रुपए लेने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी। बैंक की ओर से तीन दिन पहले 82 करोड़ की रिमांड रिजर्व बैंक को भेजी थी, लेकिन वहां से एक रुपया नहीं मिला। एटीएम भी डीडीहाट के ठप पड़े हैं।
नोटबंदी पर राजनीति भी खूब हुई
पिथौरागढ़। नोटबंदी की घोषणा के बाद कांग्रेस ने यहां कई बार प्रदर्शन किए। प्रधानमंत्री और मोदी के पुतलों को आग के हवाले किया, लेकिन सबसे खास बात यह रही कि भाजपा के किसी स्थानीय नेता ने नोटबंदी के पक्ष में कोई प्रचार अब तक नहीं किया है।
कैशलेस अपनाने में लंबा समय लगेगा
पिथौरागढ़। नोटबंदी के बाद कष्ट झेल रहे लोगों का रुझान अब भी कैशलेस को अपनाने की तरफ कम ही दिखता है। दुकानों में कहीं पर भी स्वाइप मशीन नहीं लगी है। पेटीएम से भुगतान करते यहां कोई नहीं मिलता। दुकानदार कैश में ही सामान दे रहे हैं। अभी जिला मुख्यालय में ही कैशलेस शुरू नहीं हो पाया है। ग्रामीण अंचलों के बारे में सोचना जल्दबाजी होगी।