सेमिनार में बोलते डा. शेखर पाठक
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कैलाश पवित्र भूक्षेत्र योजना के अंतर्गत कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग के कई इलाकों को यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल करने की कवायद शुरू हो गई है। इस दिशा में चल रहे प्रयास के तहत शुक्रवार को आईटीबीपी 14वीं वाहिनी के सभागार में प्रथम चरण का सेमिनार हुआ, इसमें कहा गया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग के इलाकों को विश्व धरोहर में शामिल करते समय स्थानीय समाज, संस्कृति की मान्यताओं के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। उम्मीद जताई गई कि विश्व धरोहर बनने पर इस इलाके में पर्यटन, रोजगार बढ़ेगा और जैव विविधता संरक्षण होगा।
कैलाश पवित्र भूक्षेत्र के बारे में जानकारी देते हुए कहा गया कि इसमें पश्चिमी नेपाल, तिब्बत और उत्तराखंड के 31 हजार वर्ग किलोमीटर को शामिल किया गया है। इस क्षेत्र के अध्ययन में जीबी पंत पर्यावरण संस्थान अल्मोड़ा, इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट और इंटरगवर्मेंट लर्निंग सेंटर काठमांडू सहयोग कर रहे हैं। वन्यजीव संस्थान देहरादून की ओर से तकनीकी सहयोग भी दिया जाएगा।
इसके अलावा वन विभाग, पर्यटन विभाग, स्थानीय समूहों का भी इसमें सहयोग लिया जाएगा। सेमिनार में यूनेस्को की प्रतिनिधि डा. सोनाली घोष, ज्योति नेगी, गुरमीत राय, पहाड़ पत्रिका के संपादक डा. शेखर पाठक आदि ने विचार रखे। अगले चरण में नवंबर में देहरादून में सेमिनार होगा।