थल में प्रदूषित हो चुका पानी का स्रोत
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पिछले कई चुनावों में मुद्दा रही मल्लीधारा-जोग्यूड़ा (पार बाजार) पेयजल योजना इस चुनाव में भी मुद्दा ही दिखाई दे रही है। 25 साल पुरानी इस योजना से शुद्ध पानी पिलाने की जनता की मांग पर न राजनेताओं ने ध्यान दिया, न सरकारी तंत्र की नींद टूटी। हालात यह है कि लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं।
थल कस्बे के पार बाजार वाले इलाके को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 1980-81 में बनी पेयजल योजना से लोगों को वर्षों से गंदे पानी की सप्लाई हो रही है। पिछले पांच साल से गंदे की समस्या में इजाफा हुआ है। स्रोत को खुला छोड़ दिया गया है। स्रोत की सफाई न होने से पानी के साथ कीचड़ भी लोगों को सप्लाई हो जाता है। स्थानीय लोग पिछले कई चुनावों से जलस्रोत को साफ रखने की मांग हुकमरानों और सरकारी तंत्र से कर रहे हैं, लेकिन लोगों को साफ और स्वच्छ पानी पिलाने की दशा में कदम नहीं उठाए गए। लोगों में इसको लेकर नाराजगी है।
स्रोत की सफाई नहीं की जाती
व्यापारी दामोदर लोहनी कहते हैं कि जल संस्थान कभी भी स्रोत की सफाई नहीं करवाता। लोगों को कीचड़, गंदगीयुक्त पानी की सप्लाई की जा रही है। इसका संज्ञान लिया जाना चाहिए।
लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा
ग्रामीण सतीश चंद्र कहते हैं कि गंदा पानी पिलाकर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। विभाग की लापरवाही बीमारियों को आमंत्रण दे रही है।
स्रोत की सफाई की जाएगी। लोगों को साफ पानी मिले, इसके इंतजाम किए जाएंगे। -गजेंद्र सिंह मनौला, अवर अभियंता जल संस्थान।