मांगती और मालपा के बीच रास्ते की मरम्मत होते ही घोड़ों की आवाजाही शुरू हो गई
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मांगती और मालपा के बीच पैदल रास्ते की मरम्मत हो गई है। इस रास्ते से घोड़े, खच्चर भी चलने लगे हैं। लोक निर्माण विभाग को 1300 मीटर क्षतिग्रस्त इस रास्ते की मरम्मत में खासी मशक्कत करनी पड़ी। अब मांगती और मालपा के बीच पैदल संपर्क होने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ मौसमी प्रवास पर घाटियों की तरफ आने वाले परिवारों और तिब्बत व्यापार में भाग लेने गए व्यापारियों को खासी राहत मिल जाएगी। मांगती और मालपा के बीच घोड़ों से आवागमन होने लगा है।
मांगती और मालपा में 13 अगस्त की देर रात आई आपदा में जनहानि के साथ ही पैदल रास्तों को भारी नुकसान पहुंचा था। आपदा के तुरंत बाद मालपा पहुंचे पूर्व मुख्य विकास अधिकारी आशीष चौहान ने सबसे पहले पैदल रास्ते की मरम्मत पर जोर दिया। तहसीलदार आईबी मल्ल रास्ते की मरम्मत का काम देखने के लिए लंबे समय तक मालपा में ही डटे रहे। लोनिवि के सहायक अभियंता जीएस जनौटी, अवर अभियंता इंद्र सिंह बोरा, आदित्य पाटनी आदि मालपा में ही रहकर कार्य की निगरानी करते रहे। लोनिवि के अधिशासी अभियंता एबी कांडपाल ने बताया कि इस बीच मांगती, नजंग एवं मालपा में लगभग दो सौ श्रमिकों और विभागीय कर्मचारियों ने जान जोखिम मेें डालकर रस्सियों से लटककर मार्ग निर्माण का कार्य किया।
इस बीच नजंग में लकड़ी का पुल और मालपा में अस्थायी पुल भी बनाया गया। ईई ने कहा कि शीघ्र ही नजंग में पचास लाख रुपये की लागत से स्थायी पुल बनाया जाएगा, जिससे आवाजाही में कोई परेशानी नहीं होगी। अगले दस दिनों में पुल तैयार हो जाएगा। मांगती और मालपा हादसे के बाद जिलाधिकारी सी रविशंकर लगातार लोनिवि के अधिकारियों के संपर्क में बने रहे। उन्होंने रास्ता निर्माण की रोज की रिपोर्ट जिला मुख्यालय मंगानी शुरू की। साथ ही एक समयसीमा तय कर रास्ते का निर्माण करने के निर्देश दिए। वहीं, स्थानीय लोगों ने रास्ता बनने पर राहत की सांस ली है।