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छतों पर बनाए बगीचे से चल रही आजीविका

Sat, 11 Jun 2016 10:50 PM IST
राजेंद्र सामंत/अमर उजाला, कनालीछीना
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खेती किसानी - फोटो : अमर उजाला
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फल, सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी स्थान रखने वाले कनालीछीना के डुंगरी गांव के लोगों ने अब घरों की छतों में सब्जी, फल उगाना शुरू कर दिया है। इसके फायदे भी सामने आने लगे हैं। गांव के लोगों को होम गार्डन से 3000 रुपये तक की प्रतिमाह आय हो रही है।
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डुंगरी के कुछ फल, सब्जी उत्पादकों ने घरों की छतों और खाली पड़ी जगह का उपयोग गार्डन के रूप में करना शुरू किया है। गमलों में सब्जी, फल के पौध लगाए गए। देखादेखी में और किसानों ने भी इस तकनीक को अपनाना शुरू कर दिया। प्रगतिशील किसान दीवान सिंह बिष्ट, हेमेंद्र बिष्ट, राजेश मेहता, विनोद सामंत, मीना बिष्ट, हेमा बिष्ट, कुशल सिंह, सरिता देवी कहती हैं कि इसका प्रतिफल अच्छा रहा है।

होम गार्डन में सब्जियों के साथ ही फलों का उत्पादन होने लगा है। गांव के 30 परिवार इससे आजीविका चलाने लगे हैं। हर परिवार महीने में करीब 3000 रुपये होम गार्डन से कमा ले रहा है। कनालीछीना और पिथौरागढ़ में फल, सब्जी बेची जा रही है। इस समय होम गार्डन में शिमला मिर्च, टमाटर, बैगन के साथ ही ककड़ी, कद्दू, लौकी पैदा हो रही है। खेतों की अपेक्षा घर की छतों में बंदर भी कम नुकसान पहुंचा पा रहे हैं।
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रसायनिक खाद का नहीं होता प्रयोग
डुंगरी के घरों की छतों में बनाए गए बगीचे में पैदा फल, सब्जी की खासियत यह है कि इनमें रसायनिक खाद का प्रयोग नहीं होता है। किसानों द्वारा तैयार बर्मी कंपोस्ट के साथ ही गौमूत्र का छिड़काव किया जाता है। ग्राम प्रधान चंद्रा बिष्ट कहती हैं कि कृषि विभाग ने पिछले साल बर्मी कंपोस्ट के गड्ढे बनाने के लिए किसानों से फार्म भरवाए थे, लेकिन कोई मदद नहीं दी।
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