नेपाल में चल रहे मधेसी आंदोलन और स्थानीय लोगों के विरोध के कारण पंचेश्वर बांध परियोजना के निर्माण को लेकर आशंकाएं बढ़ने लगी हैं। अब तक इस बांध परियोजना के निर्माण को लेकर प्रारंभिक सर्वे ही चल रहा है। निर्माण की कार्ययोजना नहीं बन पाई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल नेपाल दौरे के समय पंचेश्वर बांध परियोजना के निर्माण पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन एक वर्ष में नेपाल के राजनैतिक हालात काफी बदल गए हैं। नेपाल में संविधान सभा के निर्माण के बाद नई विचारधारा वाले राजनैतिक सत्ता पर काबिज हो गए हैं। इनका रुझान चीन की ओर ज्यादा है। इसके अलावा मधेसी आंदोलन ने जिस तरह का माहौल खड़ा किया है, उससे जानकारों का कहना है कि पंचेश्वर बांध परियोजना का निर्माण खटाई में पड़ सकता है। नेपाल में हाल के दिनों में जिस तरह के हालात सामने आए हैं उससे नेपाल में डीजल, पेट्रोल समेत अन्य जरूरी सामान का अभाव हो गया है। नेपाल के लोग नाकेबंदी के लिए भारत को जिम्मेदार मानते हैं। दूसरी तरफ डूब क्षेत्र में आने वाले स्थानीय लोग पहले से ही इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं।
पंचेश्वर बांध परियोजना से 6480 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसकी ऊंचाई 350 मीटर रहेगी। भारत-नेपाल सीमा पर बहने वाली महाकाली में पंचेश्वर के पास इस बांध का निर्माण प्रस्तावित है। बांध से दोनों देशों को सिंचाई की सुविधा मिलेगी और लाभ की राशि का भी विभाजन होगा।