इंजीनियरों ने डीडीहाट में राजकीय पॉलीटेक्निक का भूकंपरोधी भवन तैयार किया है। इस भवन के निर्माण में परंपरागत तकनीक का कोई इस्तेमाल नहीं किया गया है। भवन में कहीं पर भी ईंट, सीमेंट और सरिया का प्रयोग नहीं किया गया है। सिर्फ आधारशिला में कंकरीट डाली गई। भवन का ढांचा तैयार करते समय सिर्फ एल्युमीनियम के खंभों और फाइबर की चादरों का प्रयोग किया गया। इंजीनियरों का कहना है कि अब भविष्य में जितने भी सरकारी भवन बनेंगे उनमें इसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
डीडीहाट में पॉलीटेक्निक के भवन निर्माण के लिए दो वर्ष पहले दो करोड़ रुपये की मंजूरी मिली थी। मार्च 2017 में यह भवन बनकर तैयार हो गया और इसे पॉलीटेक्निक को हस्तांतरित कर दिया गया। उत्तर प्रदेश निर्माण निगम ने इस भवन को तैयार किया था। पॉलीटेक्निक के प्राचार्य मदन मोहन पंत का कहना है कि भवन भूकंप की दृष्टि से पूरी तरह सुरक्षित है, क्योंकि इसमें वजन वाली किसी भी सामग्री का प्रयोग नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि भवन के अंदर सर्दियों में गर्मी और गर्मियों में ठंड का अहसास होता है। भवन में एक हाल, आठ कमरे, कार्यालय कक्ष, प्राचार्य कक्ष बना है।
लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता सचिन सिंघल कहते हैं कि यह जिले में अपने तरह का पहला सरकारी भवन है। इससे पहले बने सभी सरकारी भवनों में ईंट, सीमेंट, सरिया, टिन का बहुत ज्यादा प्रयोग हुआ था। वह कहते हैं कि इंजीनियरों ने इस तकनीक को पर्वतीय अंचल के लिए काफी सफल माना है और आने वाले समय में सभी सरकारी भवन इसी तरह की सामग्री से तैयार होंगे। वह कहते हैं कि इस तरह के भवन पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक होते हैं, क्योंकि इनमें रोड़ी, बजरी, लकड़ी की जरूरत नहीं पड़ती। सिर्फ एल्युमीनियम और फाइबर की सामग्री की जरूरत होती है, वह बड़े शहरों में आसानी से मिल जाती है।
आपदा प्रभावित क्षेत्र में बने भूकंपरोधी मकान
जून 2013 की आपदा के समय धारचूला और मुनस्यारी तहसील में जिन लोगों के मकान ध्वस्त हुए थे, उनके लिए सरकार ने नए मकान बनाने की मंजूरी दी। दोनों तहसीलों में 640 नए मकान बनाए गए, यह सभी मकान भूकंपरोधी हैं। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी डा. आरएस राणा ने बताया कि मकान तैयार करते समय विभिन्न विभागों के इंजीनियरों से तकनीकी मदद ली गई।