पिथौरागढ़। सीमांत क्षेत्र के नारायण आश्रम में गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान, अल्मोड़ा के जैव-विविधता संरक्षण और प्रबंधन केंद्र ने हिमालयी जलवायु परिवर्तन और जैव-विविधता के ह्रास पर एक कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम संस्थान के निदेशक डॉ. आईडी भट्ट के दिशा-निर्देश पर हुआ।
डॉ. अमित बहुखंडी ने बताया कि संस्थान चौंदास घाटी में औषधीय पादपों की कृषि कर रहा है। इससे किसानों को आजीविका लाभ मिल रहा है और जैव-विविधता संरक्षण में मदद मिल रही है।
डॉ. कुलदीप जोशी ने औषधीय पादपों की महत्ता और एग्रो-तकनीक के बारे में बताया। संस्थान प्रयोगशाला में शोधों के जरिये प्रजातियों को तैयार कर परियोजना स्थलों में रोपित कर रहा है।
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. केएस कर्नवाल ने हिमालयी बुग्यालों पर मानव जनित दबाव और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर विचार साझा किए।