सेरा में लोगों को आर्शीवचन देते डोले में सवार देव डांगर।
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मां उल्का, मां महाकाली और भूमिया देवता का डोला सोमवार को धूमधाम से निकला। सेरा, खड़कोट में तमाम ग्राम देवताओं के मंदिरों में परिक्रमा के बाद डोला भवानी मंदिर होते हुए मां उल्का के दरबार पहुंचा। मंदिर में जागरण हुआ।
मां भगवती उल्का, कालिका के डोले की तैयारी परंपरागत रूप से चैत्र नवरात्र की अष्टमी से शुरू हो गई थी। अष्टमी और नवमी को सेरा गांव में दो दिनी जागर लगाया गया। देर रात तक जागर के कार्यक्रम चलते रहे। सोमवार सुबह से ही सेरा, खड़कोट के लोग डोलों की तैयारी में जुट गए। शाम को देव डांगरों के अवतरण के बाद सेरा गांव से डोले उठे। गंगनाथ मंदिर, कालिका मंदिर, भूमिया देवता मंदिर की परिक्रमा करते हुए डोले लोनिवि विश्राम गृह परिसर स्थित मां भवानी के मंदिर पहुंचे। भवानी मंदिर की परिक्रमा के बाद डोले मां उल्का के दरबार में पहुंचे।
डोलों के मां उल्का मंदिर पहुंचते ही भारी रोमांच पैदा हो गया। लोग मैय्या की जयजयकार करने लगे। मां उल्का के देव डांगर अशोक सिंह मेहता, कालिका मैय्या के देव डांगर मोहित मेहता, भूमिया देवता के डेवडांगर कवींद्र मेहता ने लोगों को आशीर्वाद दिया। वीर की भूमिका में योगेश, धर्मेंद्र, किशन सिंह मेहता थे। डोले के साथ लाल सिंह मेहता, सुरेंद्र मेहता, गजेंद्र सिंह, चंद्र सिंह महिपाल सिंह, लक्ष्मण सिंह, विक्रम सिंह मेहता, राजेंद्र सिंह मेहता, भरत सिंह मेहता, नरेंद्र सिंह मेहता आदि चल रहे थे। मंदिर में लोगों ने रात्रिभर लोगों ने रतजागा किया। भजन, कीर्तन हुए। डोले को देखने के लिए भारी संख्या में लोग मौजूद थे।