डॉ. स्वामी गुरुकुलानंद कच्चाहारी (डॉ. ज्ञान प्रकाश) ने नेत्र और अंग जरूरतमंद को, जबकि शरीर मेडिकल कॉलेज को दान करने की वसीयत लिखी है।
मूल रूप से कानपुर निवासी डॉ. ज्ञान प्रकाश पुत्र पंडित लालमणि कानपुर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने के बाद 1974 में कुमाऊं मंडल में आए। कुछ समय बाद ही उन्होंने संन्यासी का जीवन अपना लिया और डॉ. गुरुकुलानंद कच्चाहारी कहलाए। पूरे सेवाकाल में गरीब और जरूरतमंदों की 24 घंटे मुफ्त सेवा करने वाले डॉ.गुरुकुलानंद सेवानिवृत्त होने के बाद भी जनसेवा में जुटे हैं।
वह दयानंद इंटर कॉलेज में कच्चाहारी कुटी में रहते हैं। लोगों को नेत्र दान और अंग दान के लिए प्रेरित करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. तारा सिंह की पहल पर 84 वर्षीय डॉ. कच्चाहारी ने नेत्रदान, अंगदान और देहदान की वसीयत लिखी है। डॉ. कच्चाहारी ने अपनी वसीयत में लिखा है कि यदि उनका जीवन किसी अस्पताल में समाप्त होता है तो सर्जन उनके नेत्र और अंगों को प्रत्यारोपण के लिए दान में प्राप्त कर सकते हैं, जबकि उनकी देह को गणेश शंकर मेडिकल कॉलेज कानपुर या हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज को दे दिया जाए।