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एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए मां त्रिपुरा सुंदरी के दर्शन

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नेपाल के बैतड़ी में त्रिपुरा सुंदरी मेले में उमड़े श्रद्धालु। - फोटो : PITHORAGARH
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नेपाल के सुदूर पश्चिमांचल के बैतड़ी जिले का प्रसिद्ध त्रिपुरा सुंदरी मेला संपन्न हो गया हैं। एक लाख से अधिक लोगों ने मां त्रिपुरा सुंदरी के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। मेले में करीब पांच हजार भारतीय श्रद्धालु भी शामिल हुए।
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मंगलवार देर रात तक भक्तगण दीये हाथ में लेकर मनौती के लिए खड़े रहे। रात में मंदिर में 26 हवन हुए। बुधवार सुबह मां भगवती के गहने मंदिर के गर्भगृह से निकाले गए। सुबह 10.15 बजे मंदिर से सवारी मायके कापड़ी गांव गई।
सवारी के साथ मंदिर के मुख्य पुजारी हेमराज लेखक श्रद्धालुुओं को आशीर्वाद देते रहे। वहां से वापिस मंदिर में आने के बाद माता का श्रृंगार कर मंच पर ले जाया गया। उसके कुछ देर बाद बकरों और भैंसों की बलि शुरू हुई। मंदिर के आंतरिक मामलों में निर्णय लेने का अधिकार मौनी, धौल्याली, गुरु और मार्कंडेय चार राठों को है।
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इनमें लाल सिंह मौनी, बहादुर सिंह बोहरा, जय सिंह और शेर सिंह मार्कंडेय हैं। अध्यक्ष पदम चंद ने बताया कि असाड़, कार्तिक, चैत्र, असौज की नवरात्र, बसंत पंचमी, प्रत्येक महीने पूर्णिमा, अमावस्या और संक्रांति के पर्व पर ही मंदिर के किवाड़ खुलते हैं। मेले में नेपाल सरकार में वन और पर्यावरण मंत्री माया भट्ट, सशस्त्र प्रहरी बल के डीएसपी अमित साह, निरीक्षक कमल बिष्ट, जगत बहादुर ऐर मौजूद रहे।
मेला क्षेत्र में मदिरा निषेध
बैतड़ी। मेला क्षेत्र को बैतड़ी प्रहरी और मेला कमेटी ने मदिरा निषेध घोषित किया था। शराब पीकर आने वाले का दो हजार और शराब बेचने वाले का छह हजार का चालान तय किया गया था। बैतड़ी के डीएसपी दिल्ली नारायण पांडे ने बताया नियम के तहत कई चालान किए गए। मेला स्थल पर एंबुलेंस और दशरथ चंद नगर पालिका द्वारा निशुल्क हेल्थ कैंप भी लगाया गया था।
मेला कमेटी के आग्रह पर जूलाघाट से त्रिपुरा सुंदरी तक दो दर्जन से भी अधिक टैक्सियां लगाई गई थीं। टैक्सी यूनियन ने अन्य रूटों पर चलने वाली बसों और टैक्सियों को लगाया था। झूलाघाट पुलिस ने बाजार में किसी भी वाहन को नहीं आने दिया। ब्यूरो
मंदिर में चढ़ावा होता है रजिस्टर्ड
बैतड़ी। नेपाल के मंदिरों में आज भी हर चढ़ावा रजिस्टर में दर्ज होता है। मंदिर में बहुत बड़ा संदूक और बड़ा बही खाता आज भी है। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष चढ़ावे को बही खाते में दर्ज करने का काम करते हैं। जिस खाते में चढ़ावा दर्ज होता है उसे अटक कहते हैं। इसमें दस रुपये से लाखों रुपये तक का चढ़ावा दर्ज किया जाता हैं।

नेपाल के त्रिपुरा सुंदरी मेले में उमड़ा अपार जन सैलाब।- फोटो : PITHORAGARH

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