पिथौरागढ़। आज का युग बैटरी का है। मोबाइल सहित अन्य उपकरणों के साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए तेजी से बैटरी की मांग बढ़ रही है। अधिकांश लीथियम बैटरी का बैक अप कम होने के साथ एक समय के बाद ये साथ छोड़ जाती हैं। इससे उपकरण भी खराब हो जाते हैं या उनकी उम्र भी कम हो जाती है। अब ऐसा नहीं होगा। अब सभी लीथियम-आयन बैटरी की उम्र बढ़ेगी और यह दो से तीन गुना अधिक समय तक साथ देंगी। इनकी क्षमता में भी कोई बदलाव नहीं होगा। सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज, आईआईटी धनबाद, जीएल बजाज और तुला इंस्टीट्यूट देहरादून के इंजीनियरों ने यह तकनीक ईजाद की है। इसे नाम दिया है स्टेट ऑफ हेल्थ ऑफ लीथियम आयन बैटरी। बाकायदा विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक्स अभियांत्रिकी संस्थान(आईईईई) में इसका शोध पत्र प्रकाशित भी हुआ है और इसे मान्यता भी मिली है।
इस तकनीक को ईजाद करने में सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रो. अखिलेश सिंह, आईआईटी धनबाद के प्रो. गोविंद मुर्मू, जीएल बजाज, नोएडा के प्रो. नागेंद्र कुमार और तुला इंस्टीट्यूट के प्रो. सुनील सेमवाल ने सफलता हासिल की है। प्रो. अखिलेश सिंह ने बताया कि आम तौर पर किसी लीथियम बैटरी की क्षमता समय के साथ कम होने से वह तेजी से डिस्चार्ज होती है। इसका असर उपकरणों पर पड़ता है। ऐसे में उपकरणों की बैटरी बदलना ही एकमात्र उपाय होता है। इस तकनीक के जरिये बैटरी के इन विकारों का सटीक पता लगाकर उनका इलाज करते हुए उसकी क्षमता और डिस्चार्ज होने का समय दो से तीन गुना बढ़ेगा। बैटरी को उपयोग से बाहर नहीं करना होगा और वह लंबे समय तक साथ देगी। यानी इन बैटरी की उम्र बढ़ेगी और क्षमता में भी कोई बदलाव नहीं होगा।
प्रो. अखिलेश सिंह ने बताया किइस तकनीक को ईजाद करने का उद्देश्य विश्वभर में बढ़ते ऊर्जा संकट, पर्यावरण प्रदूषण और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करना है। लीथियम बैटरी भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था का प्रमुख आधार बनकर उभर रही है। मोबाइल से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन और अन्य उपकरणों में इसका प्रयोग हो रहा है। यदि इन बैटरी की क्षमता और उम्र बढ़ेगी तो आम जनता के साथ ही देश की बड़ी रकम की बचत होगी। बैटरी में खराबी के चलते उपकरण भी खराब नहीं होंगे और यह तकनीक देश हित में लाभकारी होगी। संवाद
लिथियम-आयन बैटरियों की मांग और बढ़ेगी
प्रो. अखिलेश सिंह ने बताया कि भविष्य में इस तकनीक का लाभ इलेक्ट्रिक कारों, इलेक्ट्रिक बसों, इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों, सौर ऊर्जा संयंत्रों, पवन ऊर्जा परियोजनाओं और घरेलू ऊर्जा भंडारण प्रणालियों में होगा। यदि सटीक उपचार से क्षमता और डिस्चार्ज होने का समय बढ़ेगा तो बिजली आपूर्ति और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के विस्तार के साथ लिथियम-आयन बैटरियों की मांग और बढ़ेगी। इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी।