जिला एवं सत्र न्यायालय का फैसला
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जिला एवं सत्र न्यायालय ने मंगलवार को पूर्व फौजी के हत्यारे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में एक अन्य आरोपी को न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया। अभियुक्त पर दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न देने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भोगनी होगी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार गंगोलीहाट तहसील के बडेना (बुंगली) निवासी पूर्व फौजी जगत सिंह, प्रधान पति कल्याण सिंह की ओर से कराए जाने वाले निर्माण कार्य की देखरेख और मजदूरों का हिसाब करता था। 28 जून 2013 की रात दस बजे अभियुक्त बडेना गांव निवासी श्याम सिंह, जगत सिंह के घर गया और जगत सिंह से कहने लगा कि प्रधान पति कल्याण सिंह ने मेरे लिए जो पांच हजार रुपये दिए हैं, उन्हें तत्काल मुझे दे दो। जगत सिंह ने कहा कि उसे कोई रुपये नहीं दिए गए हैं। इतने में श्याम सिंह बौखला गया और उसने जगत सिंह के घर पर पथराव कर दिया, साथ ही जान से मारने की धमकी देने लगा। रात में ही जगत सिंह ने इस घटना की जानकारी प्रधान को दे दी। अगले दिन 29 जून 2013 की सुबह सात बजे ग्राम प्रधान मोहनी देवी ने दोनों पक्षों का राजीनामा कराने के लिए पूर्व फौजी जगत सिंह, अभियुक्त श्याम सिंह, एक अन्य मजदूर अमर सिंह को अपने घर पर बुलाया। वहां पर भी श्याम सिंह किसी प्रकार के राजीनामा के लिए तैयार नहीं हुआ और जगत सिंह को जान से मारने की धमकी देकर चला गया।
ग्राम प्रधान मोहनी देवी ने उसी समय उपजिलाधिकारी के लिए एक पत्र तैयार किया कि दोनों पक्षों में राजीनामा नहीं हो पाया है और इस पत्र को लेकर पूर्व फौजी जगत सिंह उपजिलाधिकारी से मिलने गंगोलीहाट जाने लगा। तभी गांव की सीमा पर खेत के पास खड़े श्याम सिंह और अमर सिंह मिल गए। आरोप था कि श्याम सिंह ने पूर्व फौजी जगत सिंह का सिर पत्थरों से कुचलकर हत्या कर दी। इस घटना को ठीक पीछे से आ रहे मृतक के बेटे राकेश सिंह ने देख लिया। मृतक की जेब से वह पत्र भी बरामद हुआ जिसे वह एसडीएम को देने जा रहा था। मृतक की नाबालिग बेटी कमला ने इस घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई।
न्यायालय ने इस मामले में आठ गवाहों के बयान लिए। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेंद्र जोशी ने श्याम सिंह को धारा 302 में आजीवन कारावास और दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। धारा 201 में पांच साल की सजा और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। दूसरे आरोपी अमर सिंह को धारा 302 और 201 में साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।