पिथौरागढ़। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में चिकित्सकों और रेडियोग्राफर के पद लंबे समय से खाली हैं। इससे राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में खाली पदों का प्रतिशत 2005 से लगातार बढ़ रहा है। इस कारण जिला चिकित्सालयों में रोगियों का दबाव बढ़ता जा रहा है। इसके बाद भी सरकार ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं सुधारने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रही है। इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
वर्ष 2005 में राज्य के 44 सीएचसी में स्वीकृत चिकित्सकों के 163 पदों के सापेक्ष 92 चिकित्सक कार्यरत थे। अस्पतालों में 71 पद खाली थे। यह रिक्त पदों का प्रतिशत 56 था। चिकित्सकों के खाली पदों का प्रतिशत वर्ष 2015 में 75 प्रतिशत और वर्ष 2017 में 80 प्रतिशत तक पहुंच गया। वर्ष 2017 में स्वीकृत पद 200 होने के बावजूद चिकित्सक 41 ही कार्यरत थे। वर्ष 2019 में सीएचसी की संख्या 44 से बढ़कर 67 हो गई। इनमें चिकित्सकों के 284 पद स्वीकृत थे। इसके सापेक्ष मात्र 27 चिकित्सक ही कार्यरत थे। इस वर्ष चिकित्सकों के रिक्त पदों का प्रतिशत 90 प्रतिशत पहुंच गया। वर्ष 2020-21 में सीएचसी की संख्या 67 से घटकर 53 रह गई। इस कारण सीएचसी में चिकित्सकों के सृजित पद भी 284 से घटकर 236 रह गए। इसके सापेक्ष 184 चिकित्सक ही कार्यरत हैं। अब खाली 52 पद पदों का औसत 78 प्रतिशत है। यह राष्ट्रीय औसत से अधिक है। इस वर्ष भारत के ग्रामीण क्षेत्रों के सीएचसी में 68 प्रतिशत पद खली हैं।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों के 115 पद रिक्त
पिथौरागढ़। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में पीएचसी में 115 विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद खाली हैं। वर्ष 2005 में प्रदेश में 225 पीएचसी थे। इनमें चिकित्सकों के 272 पद रिक्त थे। इसके सापेक्ष 182 चिकित्सक कार्यरत और 90 पद रिक्त थे। चिकित्सकों के खाली पदों का प्रतिशत 33.09 प्रतिशत था। वर्ष 2015 में पीएचसी बढ़कर 257 हो गए। स्वीकृत पद भी बढ़कर 325 हो गए। इसके सापेक्ष 160 चिकित्सक कार्यरत और 165 चिकित्सकों के पद रिक्त थे। खाली पदों का प्रतिशत बढ़कर 50.77 प्रतिशत हो गया। वर्ष 2021 में पीएचसी घटकर 245 हो गए। इसमें स्वीकृत पद बढ़ाकर 416 कर दिए। इसके सापेक्ष अब सिर्फ 301 चिकित्सक कार्यरत हैं और 115 चिकित्सकों के पद खाली हैं। चिकित्सकों के रिक्त पदों का प्रतिशत बढ़कर 27.64 प्रतिशत पहुंच गया है। संवाद
सीएचसी सेंटरों में रेडियोग्राफर के 21 पद रिक्त
पिथौरागढ़। राज्य के 53 सीएचसी में रेडियोग्राफर के 21 पद खाली हैं। वर्ष 2005 में राज्य के 44 सीएचसी में रेडियोग्राफर के 40 पद स्वीकृत थे। इनमें सिर्फ 30 कार्यरत और 10 पद रिक्त थे। रेडियोग्राफर के खाली पदों का प्रतिशत 25 प्रतिशत था। वर्ष 2015 में 59 सीएचसी में 30 पद स्वीकृत थे। इसके सापेक्ष 16 कार्यरत और 14 पद रिक्त थे। इस साल रिक्त पदों का प्रतिशत 46.67 प्रतिशत था। वर्ष 2017 में 60 सीएचसी में 32 पद स्वीकृत थे। इसके सापेक्ष 15 ही रेडियोग्राफर कार्यरत थे। रेडियोग्राफर के 17 पद खाली थे। रिक्त पदों का प्रतिशत बढ़कर 53.16 प्रतिशत पहुंच गया। वर्ष 2021-22 में 53 सीएचसी में रेडियोग्राफर के 37 पद स्वीकृत थे। इसके सापेक्ष 16 कार्यरत और 21 पद रिक्त हैं। खाली पदों का प्रतिशत बढ़कर 56.76 प्रतिशत पहुंच गया है।
ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकी 2020-21 के आधार पर उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर फैक्ट सीट बनाई गई है जिसमें राज्यभर के सीएचसी, पीएचसी में चिकित्सकों और रेडियोग्राफर के खाली पदों का आंकड़ा प्रस्तुत किया गया है। रिपोर्ट में पता चल रहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल होने से जिला अस्पतालों पर रोगियों का भार पड़ रहा है। यह रिपोर्ट तैयार करने के लिए सूचना के अधिकार की भी मदद ली गई है। - शिवम पांडे, उत्तराखंड रिसर्च ग्रुप।
प्रदेश के सभी सीएमओ को आदेश जारी कर दिए हैं कि नियमित नियुक्तियां होने तक वह संविदा, उपनल, पीआरडी के माध्यम से चिकित्सकों और अन्य पदों पर नियुक्ति कर सकते हैं। कई जिलों में नियुक्तियां हो भी चुकी हैं। - डॉ. शैलजा भट्ट, स्वास्थ्य महानिदेशक, उत्तराखंड।