झूलाघाट में स्टेट बैंक के एटीएम में पसरा सन्नाटा
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एक ओर जहां पिथौरागढ़ नगर के एटीएम में पैसा पड़ते ही लंबी लाइन लग रही है, वहीं ग्रामीण इलाकों के एटीएम से पैसा निकालने में लोग असुविधा महसूस करते हैं। वह काउंटर से भुगतान को ही वरीयता देते आए हैं और बैंकों में कम भीड़ होने से उनको तत्काल भुगतान भी मिल जाता है।
स्टेट बैंक की बड़ाबे शाखा में क्षेत्र के व्यापारियों और ग्रामीणों के 9000 खाते हैं। यहां पर नोटबंदी के बाद 2 बार एटीएम में पैसा डाला गया है। ग्रामीण क्षेत्र होने की वजह से लोग एटीएम का प्रयोग कम करते हैं। बैंक में भीड़ कम होने की वजह से लोग बैंक के काउंटर से ही पैसा निकाल लेते हैं। ग्रामीणों को एटीएम के प्रयोग की आदत कम है। फिर एटीएम से मात्र दो हजार रुपए मिल रहे हैं, जबकि बैंक के काउंटर से चेक या विल्ड्रॉल फार्म लगाने पर दस हजार रुपए तक की रकम एकमुश्त मिल जाती है। बड़ाबे से कई लोग रोज पिथौरागढ़ बाजार आते हैं। वह जरूरत पड़ने पर यहां के एटीएम से पैसा निकाल लेते हैं। स्टेट बैंक बड़ावे के शाखा प्रबंधक मितेश कुमार ने बताया कि अब तक एटीएम में 20 लाख रुपए डाले जा चुके हैं। सभी नोट 2000 के हैं, लेकिन 60 प्रतिशत ही पैसा निकल पाया हैं। अभी भी एटीएम में काफी पैसा पड़ा है।
ऐसा ही हाल नेपाल सीमा से सटे एसबीआई झूलाघाट के एटीएम के भी है। यहां भी नोटबंदी के बाद से 3 बार 2000 के नए नोट पड़ चुके हैं और एटीएम से 2000 रुपए एक बार में निकल भी रहे हैं, परंतु बैंक शाखा के अंदर भीड़ कम होने और लोगों को एटीएम के प्रयोग की आदत न होने से इसमें निकासी कम हो रही है। कुछ व्यापारी एवं अन्य लोग एटीएम का प्रयोग करते हैं, लेकिन गांवों से आने वाले लोग सीधे बैंक में चले जाते हैं। वहां से उनको भुगतान भी मिल जाता है। एटीएम में पैसा डालने का काम एसएसएमएस प्राइवेट कंपनी का है, जो मोबाइल वैन के माध्यम से पैसा डालती है। एटीएम में पैसा समाप्त होने की जानकारी कंपनी को मिल जाती है।