तेंदुए द्वारा मारी गई बकरियों को देखने पहुंची वन विभाग की टीम और ग्रामीण
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बंगापानी तहसील के अंतर्गत मवानीदवानी ग्राम पंचायत के मनकोट गांव निवासी गोवर्धन राम के दोनों बच्चे महेंद्र और हरीश तेंदुए के हमले में बाल-बाल बच गए। यह दोनों बच्चे सोमवार को गांव के नजदीक मल्लासैण के जंगल में बकरियों को चराने ले गए थे। अपरान्ह करीब तीन बजे बकरियों के झुंड के बीच एक तेंदुआ अचानक पहुंच गया। बच्चे तेंदुए से मात्र 10 मीटर की दूरी पर थे।
जैसे ही तेंदुए ने एक-एक कर बकरियों को मारना शुरू किया तो दोनों बच्चों ने घर की तरफ दौड़ लगा दी। शाम को कोई भी बकरियों की तलाश में जा पाने का साहस नहीं कर पाया। दो बकरियां तेंदुए से बचकर रात में घर आ गई। मंगलवार को जब वन विभाग की टीम के साथ जंगल जाकर बकरियों की तलाश की तो जगह-जगह बिखरे हुए 14 बकरियों के शव मिले। चार बकरियां अभी लापता हैं। जंगल में चरने के लिए कुल 20 बकरियां गई थी।
जान बचाकर घर पहुंचे 14 वर्षीय महेंद्र और 12 वर्षीय हरीश ने गांव के लोगों को बताया कि तेंदुआ तेजी से आया और उसने सीधे बकरियों पर हमला कर दिया। महेंद्र कक्षा नौ में और हरीश कक्षा सात में मवानीदवानी इंटर कॉलेज में पढ़ता है। इस घटना से दोनों दहशत में हैं। गोवर्धन राम ने कहा कि उसकी 14 बकरियों को तेंदुए ने मार दिया, लेकिन बच्चे सही सलामत तेंदुए से बचकर आ गए।
घटना की जानकारी मिलते ही वन रक्षक राम सिंह के नेतृत्व में एक टीम ने मल्लासैण जंगल का दौरा किया। वन रक्षक ने बताया कि चार बकरियों को तेंदुआ मारकर अपने साथ ले गया होगा। वन विभाग ने रिपोर्ट तैयार कर ली है और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने के लिए डीएफओ को पत्र लिख दिया है। गोवर्धन बकरी पालन कर आजीविका चलाता था।