थल (पिथौरागढ़)। पांखू के टाना निवासी भारतीय सेना के सड़क अनुरक्षण प्लाटून के पूर्व सिपाही एवं शौर्य चक्र विजेता भूपाल सिंह कार्की (81) का सोमवार देर शाम निधन हो गया। उनके निधन से पुंगराऊं घाटी में शोक की लहर है।
कार्की 1965-66 में सेना में भर्ती हुए। 37 साल 7 माह की देश सेवा के बाद वह 2003 में सेवानिवृत्त हुए। 18 जुलाई 1987 को नगालैंड के कोंगन गांव के पास रात 8:30 बजे हथियारों से लैस नागा युवकों की भीड़ ने उनके कैंप पर हमला कर दिया था। सिपाही भूपाल सिंह कार्की ने जवाबी कार्रवाई में मोर्चा संभालते हुए अदम्य शौर्य और साहस से उनका डट कर सामना किया। इस दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
उनके साहस से कैंप में जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ। उनके इस अदम्य साहस और शौर्य के चलते दो अप्रैल 1987 को तत्कालीन राष्ट्रपति स्वामी वेंकटरमण ने उन्हें शौर्य चक्र पदक से सम्मानित किया। मंगलवार की सुबह क्रांति और राम गंगा के त्रिवेणी घाट पर उनकी अंत्येष्टि की गई। चिता को मुखाग्नि उनके बेटे प्रमोद सिंह कार्की और विनोद सिंह कार्की ने दी।
पूर्व सैनिक संगठन के सदस्यों ने उनके शव पर पुष्प चक्र अर्पित किया। वहां थानाध्यक्ष प्रकाश चंद्र पांडे, उप निरीक्षक भुवन चंद्र पांडे, तहसील के प्रशासनिक अधिकारी शंकर राम, पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष गोविंद भट्ट, उमेद सिंह कार्की, हरीश सिंह, राजस्व उप निरीक्षक दीपक पंचोली, पंकज सिंह महरा, क्षेत्र पंचायत सदस्य चंदू कार्की, विजेंद्र सिंह आदि थे।