मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। विकासखंड के आपदा प्रभावित गांव झापुली, बोना और गोल्फा में हालात ठीक नहीं है। यहां अब भी जमीन धंस रही है, जिससे खतरा बढ़ता जा रहा है। भूगर्भीय सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है। ऐसे में यहां के आपदा प्रभावितों का विस्थापन जरूरी है। जल्द ही टीम मामले की रिपोर्ट तैयार कर प्रशासन को भेजेगी।
मुनस्यारी के बोना, तोमिक, झापुली, गोल्फा, टांगा, बिंदी, चंखलियां, गीखू ,धापा, मालुपाती, जोशा, मदरमा, पत्थरकोट, भैंसखाली, रतगड़ी, आलम आदि गांवों में बीते वर्ष आपदा ने आफत फैलाई। भूस्खलन होने से कई मकान ध्वस्त हो गए तो कई मकानों में दरारें आ गईं। तब आपदा प्रभावितों को स्कूलों, पंचायत घर और रिश्तेदारों के यहां शिफ्ट कर इनके विस्थापन के दावे किए गए थे। आपदा के 10 महीने बाद इन गांवों का भूगर्भीय सर्वेक्षण नहीं हुआ तो प्रभावितों के विस्थापन की कार्यवाही अटक गई।
नाराज प्रभावितों ने बीते दिनों तहसील परिसर में धरना देते हुए जब आंदोलन की चेतावनी दी तो भूगर्भीय सर्वेक्षण की टीम बमुश्किल बोना, झापुली और गोल्फा गांवों में पहुंची है। टीम के मुताबिक इन गांवों में हालात सामान्य नहीं हैं। अब भी यहां भू-धंसाव जारी है। जमीन में पड़ी दरारें लगातार चौड़ी होती जा रही हैं। तीन गांवों के भूगर्भीय सर्वेक्षण में चिंताजनक हालात सामने आए हैं। टीम के मुताबिक यहां कई मकान रहने लायक नहीं हैं। अभी 10 से अधिक प्रभावित गांवों का भूगर्भीय सर्वेक्षण होना। सभी गांवों का भूगर्भीय सर्वेक्षण होने पर हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। टीम में भू वैज्ञानिक डॉ. हरीश बिष्ट, राजस्व उपनिरीक्षक डिगर सिंह आदि शामिल रहे।
आपदाकाल नजदीक, बढ़ी प्रभावितों की चिंता
बीते वर्ष आपदा में इन गांवों के 80 से अधिक परिवार प्रभावित हुए थे। इस वर्ष फिर से आपदाकाल नजदीक है। आपदाकाल से पहले प्रभावितों का विस्थापन नामुमकिन सा है। ऐसे में आपदा प्रभावितों की चिंता बढ़ने लगी है।
कोट
मुनस्यारी के आपदा प्रभावित गांवों का भूगर्भीय सर्वेक्षण किया जा रहा है। बोना, झापुली और गोल्फा में अब भी भू-धंसाव जारी है। हालांकि इसकी रफ्तार बेहद धीमी है। बारीकी से सर्वेक्षण कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दी जाएगी। इसके बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा। - डॉ. हरीश बिष्ट, भू वैज्ञानिक, पिथौरागढ़