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हर घर में तैयार होने लगी लक्ष्मी की चौकी

Sat, 29 Oct 2016 11:06 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
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लक्ष्मी की चौकी तैयार करतीं सोनी उपाध्याय - फोटो : अमर उजाला
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कुमाऊं में दिवाली के त्यौहार का उल्लास कुछ अलग रहता है। दिवाली के दिन महालक्ष्मी पूजन के लिए लक्ष्मी की चौकी अनिवार्य रूप से बनाई जाती है। घर की देली में ऐपण डालने के बाद लक्ष्मी के पौ (पदचिन्ह) बनाए जाते हैं। इन पौ को घर के पूजा स्थल और रुपए, जेवर रखने वाले स्थान तक बनाया जाता है।
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पहले लोग लाल मिट्टी, गेरू और चावल के आटे (बिस्वार) की मदद से ऐपण तैयार करते थे। इनमें मेहनत ज्यादा पड़ती थी और आकर्षकता कम होती थी, लेकिन अब इसकी जगह लोगों ने लाल और सफेद पेंट का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। पेंट से बने ऐपण एक वर्ष तक खराब नहीं होते। इनको तैयार करते समय बारीक पेंट ब्रश का प्रयोग होता है। युवा महिलाएं इस कला को बेहतरीन जानती हैं।

थल निवासी सोनी उपाध्याय ने बताया कि पहले घर की सफाई की जाती है। फिर देली से लेकर मंदिर तक ऐपण बनाए जाते हैं। यहां तक कि महालक्ष्मी के पौ के साथ-साथ रास्ता भी पेंट से तैयार किया जाता है। उन्होंने कहा कि अब ऐपण ज्यादा स्पष्ट बनते हैं। बिस्वार और गेरू से बनने वाले ऐपण में उतनी बारीकी नहीं आती थी। थल निवासी राखी वर्मा ने बताया कि ऐपण का महत्व जितना घर की देली में होता है, उतना ही घर के पूजा स्थल का भी होता है। पूजा स्थल में ऐपण डालने में ज्यादा मेहनत होती है। पूजा स्थल में ऐपण तैयार करने में कभी-कभी तीन दिन भी लग जाते हैं। पूजा स्थल में महालक्ष्मी की चौकी तैयार करने के बाद ही पूजन होता है।
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