कुमाऊंनी भाषा के उत्थान के लिए चर्चा को जुटे साहित्यकार
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पिथौरागढ़ में हुई कुमाऊंनी भाषा गोष्ठी और कुमाऊंनी कवि सम्मेलन में कुमाऊंनी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की गई। विद्यालयी पाठ्यक्रम में कुमाऊंनी को शामिल करने के साथ ही कुमाऊंनी भाषा को रोजगार से जोड़ने की भी मांग की गई।
पद्मा दत्त पंत की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने कुमाऊंनी भाषा को समृद्ध बताते हुए कहा कि इसका सम्मान होना ही चाहिए। भारत सरकार को इस भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करना चाहिए। गोष्ठी के दौरान डा. आनंदी जोशी, प्रकाश जोशी शूल, जनार्दन उप्रेती, महेश पुनेठा, चिंतामणि जोशी, दिनेश भट्ट, आशा सौन ने मुख्य अतिथि कुमाऊंनी मासिक पत्रिका पहरू के संपादक डा. हयात सिंह रावत का पगड़ी पहनाकर स्वागत किया।
कवि सम्मेलन में कवि शूल ने एक स्यानि एसि हुंछि, आशा सौन ने तुम मन नि हारो भुला-भुली, डा.आनंदी जोशी ने हम सबै छूं माली ये का, यो फूल की क्यारी छ कविता सुनाई। मथुरा दत्त चौसाली ने आज देश हम सबन है ठुलो, बीएल रोशन ने बात पूरी बिगाड़ि भेर बै रयो, गोपाल सती ने द्योरा यो मेरो जवाब जरूर कै दिया, हेमा थलाल ने यो छ मेरो प्यारो कुमाऊं कविता प्रस्तुत की। इस दौरान नवीन विश्वकर्मा, डा. दिनेश पाठक, गोविंद कफलिया, नूतनकृष्ण पांडेय, चंदन सिंह डसीला, सरिता कांडपाल, भवानी शंकर कांडपाल, रमेश चंद्र शर्मा आदि मौजूद थे।