नौ हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित और सड़क मार्ग से 15 किलोमीटर दूर कनार के भगवती मंदिर में बृहस्पतिवार को लगे मेले में हजारों की भीड़ उमड़ गई। पिछले साल कनार का मेला गांव में अशुद्धि के कारण नहीं हो पाया था। इस बार दूर-दूर से सैकड़ों की संख्या में लोग मंदिर पहुंचे।
कहते हैं कि कनार की भगवती लोगों की मनोकामना पूरी कर देती है। इसे न्याय की देवी के रूप में भी पूजा जाता है। कनार के मंदिर में मुख्य मेला मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन लगता है। वैसे साल में हमेशा पूजा अनुष्ठान चलते रहते हैं।
कनार जाने के लिए पय्यांपौड़ी से 15 किलोमीटर की सीधी चढ़ाई है। फिर भी आस्था में डूबे लोग मंदिर तक पहुंच ही जाते हैं। जाराजिबली, मेतली, पय्यांपौड़ी, जौलजीबी, बरम, चामी, लुमती, घट्टाबगड़, छोरीबगड़, गोल्फा, बोना, तोमिक, मदकोट, खेला समेत धारचूला, मुनस्यारी से भी भक्त पहुंचे।
अपार भीड़ होने के बावजूद कनार गांव के लोग सभी के रहने की व्यवस्था कर देते हैं। दिनभर पूजा अर्चना, देवी जागरण का कार्यक्रम चलता रहा। देर शाम से मनौती मांगने वाले लोग मंदिर परिसर में दीया जलाकर बैठ गए। शुक्रवार को मंदिर में फिर विशेष पूजा होगी। बरपानी नामक स्थान से पानी लाया जाएगा।
उससे देवी की मूर्ति का अभिषेक होगा। उसके बाद उस पानी को आसपास के सभी गांवों के मुखियाओं को बांटा जाएगा।