पिथौरागढ़ में नैनीसैनी हवाई पट्टी पर धरना देते कैलाश यात्री
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छियालेख में छाई घनी धुंध ने दसवें दिन भी कैलाश मानसरोवर यात्रियों के 10वें दल की उड़ान को बाधित कर दिया। परेशान यात्रियों ने नैनीसैनी हवाई पट्टी परिसर पर ही धरना देकर हनुमान चालीसा का पाठ किया और भगवान भोलेनाथ के भजन गाए। यात्रियों में सरकार और वायुसेना के खिलाफ जबर्दस्त आक्रोश है। उन्होंने कहा कि यदि पैदल मार्ग ठीक होता तो उन्हें दिक्कत नहीं होती।
10वें दल के यात्री शनिवार सुबह साढ़े पांच बजे पर्यटक आवास गृह से गुंजी रवाना होने के लिए नैनीसैनी हवाई पट्टी पहुंचे। हवाई पट्टी पर करीब पांच घंटे इंतजार करने के बाद उनका धैर्य जवाब दे गया। परेशान यात्री हवाई पट्टी परिसर में ही धरने पर बैठ गए। सभी 23 यात्रियों ने तेज उच्चारण में हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया। इसके बाद उन्होंने नम: शिवाय ओम नम: शिवाय, हर-हर बोले नम: शिवाय भजन गाया। यात्रियों में इस बात को लेकर खासा आक्रोश था कि वह रोज हवाई पट्टी आ रहे हैं। सामान को एक हेलीकॉप्टर से दूसरे में ढो रहे हैं। बावजूद इसके वह आगे की यात्रा पर रवाना नहीं हो पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उन्हें रोज घंटों यहां बैठाकर अनावश्यक परेशान किया जा रहा है। उनके आधे साथी गुंजी में इंतजार कर रहे हैं। उन्हें यात्रा पर आए 16 दिन हो गए हैं। यदि यात्रा सुचारु होती तो आज वह कैलाश की परिक्रमा कर वापस आ गए होते। उन्होंने कहा कि सरकार को सड़क और पैदल मार्गों की व्यवस्था को दुरुस्त करना चाहिए। बाद में छियालेख में मौसम खराब होने के चलते वायुसेना के हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सके। इसके चलते यात्रियों को मायूस होकर पर्यटक आवास गृह लौटना पड़ा। यात्रा के नोडल अधिकारी दिनेश गुरुरानी ने बताया कि रविवार को मौसम खुलने के बाद यात्रियों को गुंजी पहुंचाया जाएगा।
दो यात्रियों ने बीच में ही यात्रा छोड़ने का निर्णय लिया
पिथौरागढ़। पिछले 10 दिनों से मौसम खराब होने के कारण पिथौरागढ़ में फंसे 10वें दल के दो यात्रियों ने आगे की यात्रा बीच में ही छोड़ने का निर्णय लिया है। राजस्थान के कृष्णकांत पारिख ने कहा कि वह वायुसैनिकों के व्यवहार को देखते हुए यात्रा को बीच में ही स्थगित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से हवाई पट्टी पर आकर वापस जाने का क्रम बना हुआ है। एनआरआई गोपीकृष्णा निवासी गुंटूर आंध्रप्रदेश ने कहा कि कभी वायुसेना के अधिकारी विलंब से आते हैं तो कभी एयरक्राफ्ट समय पर चालू नहीं होता है। कहा कि उनकी यात्रा खतरे में हैं। कहा कि वह भी अब आगे की यात्रा नहीं करना चाहते हैं।
धारचूला से बूंदी की व्यवस्था हो
पिथौरागढ़। पिछले दस दिनों से मौसम खुलने का इंतजार कर रहे यात्रियों ने कहा कि यदि सरकार को कैलाश मानसरोवर यात्रा की इतनी ही चिंता होती तो उन्हें धारचूला से बूंदी ले जाया जाता। इसके लिए छोटे हेलीकॉप्टरों की व्यवस्था की जानी चाहिए थी। गुजरात के प्रद्युम्न सिंह राणा और राजस्थान के राहुल पारिख ने कहा कि मौसम खराब होने से हेलीकॉप्टर उड़ नहीं सकते, पैदल मार्ग सही नहीं हैं। ऐसे में वह यहां पहुंचकर महज बेवकूफ ही बने हैं।