कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग का निरीक्षण करते एसडीएम आरके पांडे
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कैलाश मानसरोवर यात्रियों एवं भारत-चीन सीमा पर रहने वालों को इस साल पैदल रास्ते से आवाजाही में भारी परेशानियां उठानी पड़ सकती हैं। गर्बाधार से बूंदी तक पहुंचने के लिए सभी को नेपाल से होते हुए जाना पड़ सकता है। विगत दिनों लखनपुर के पास हुए भूस्खलन के बाद सड़क निर्माण की प्रगति की स्थिति का जायजा लेने गए एसडीएम आरके पांडे के समक्ष सीमा सड़क संगठन के अधिकारियों ने अप्रैल तक नजंग गाड़ तक मोटर मार्ग पहुंचाने में असमर्थता जताई। साथ ही कैलाश यात्रा और मौसमी प्रवास के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने का सुझाव दिया।
गर्बाधार से लखनपुर होते हुए मालपा तक मार्ग निर्माण कार्य करा रही कंपनी गर्ग एंड गर्ग एवं सीमा सड़क संगठन ने चार अप्रैल 2018 तक नजंग गाड़ तक सड़क पहुंचाने का लक्ष्य रखा, लेकिन अब मार्ग पूरा करने में असमर्थता जता दी। 67-आरसीसी सीमा सड़क संगठन ने एसडीएम को लखनपुर एवं नजंग गाड़ के पार नेपाल तक अस्थायी पुल और अस्थायी मार्ग बनाकर कैलाश यात्रा संचालित करने सुझाव दिया है।
बता दें कि गर्बाधार से आगे सड़क निर्माण का कार्य वर्ष 1998 से चल रहा है। बीस साल में मात्र 5 किमी सड़क ही बन पाई है। कार्य प्रगति के लिए विगत अक्तूबर में एसडीएम धारचूला के साथ हुई बैठक में तय हुआ था कि सीमांतवासी एक दिसंबर तक मौसमी प्रवास पर जाने के लिए धारचूला पहुंच जाते हैं। इसी कारण दिसंबर से एक अप्रैल तक लखनपुर से मालपा तक का रास्ता बंद किया गया। अब सड़क निर्माण संस्था सीमा सड़क संगठन फिर से एक बार नाकाम नजर आ रही है। अप्रैल में भारत-चीन सीमा पर निवास करने वाले व्यांस घाटी के लोग वापस लौटेंगे। जून से कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू हो जाएगी।
ऐसे में अधूरे मार्ग से होते हुए सीमांत में आवाजाही करना खतरे से खाली नहीं होगा। एसडीएम पांडे ने बताया कि पूरी स्थिति से डीएम को अवगत कराया जाएगा। एसडीएम के साथ भारत-तिब्बत व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन रौंकली, सचिव चक्र सिंह, ग्राम प्रधान कुटी सामाजिक कार्यकर्ता गुलाब कुटियाल सहित राजस्व एवं विविध विभागों के टीम भी उपस्थित थे।