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Pithoragarh: धारचूला से महज पांच घंटे में गुंजी पहुंच जाएंगे कैलाश मानसरोवर यात्री, प्रशासन ने शुरू की तैयारी

Wed, 23 Apr 2025 01:30 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़

सार

इस बार कैलाश मानसरोवर यात्रा सुगम होगी। कैलाश यात्री सड़क मार्ग से धारचूला से महज पांच घंटे में गुंजी पहुंच जाएंगे। यात्रियों की सुविधा के लिए प्रशासन की ओर से सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त की जा रही हैं।
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कैलाश मानसरोवर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पांच साल बाद शुरू होने जा रही कैलाश मानसरोवर यात्रा इस बार सुगम होगी। कैलाश यात्री सड़क मार्ग से धारचूला से महज पांच घंटे में गुंजी पहुंच जाएंगे। यात्रियों की सुविधा के लिए प्रशासन की ओर से सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त की जा रही हैं।

तिब्बत स्थित कैलाश मानसरोवर की यात्रा हिंदुओं की प्रमुख धार्मिक यात्रा है। चीन के साथ सीमा विवाद और कोरोना के चलते यह यात्रा बंद हो गई थी। पांच साल बाद यह यात्रा फिर से शुरू होने जा रही है। विशेष यह है कि लिपुलेख तक सड़क बन जाने से इस बार कैलाश यात्रियों को पैदल नहीं चलना पड़ेगा और पूरी यात्रा वाहन से ही तय कर सकेंगे। यात्रियों को कुमाऊं मंडल विकास निगम के पर्यटक आवास गृहों में ठहराया जाएगा। सड़क मार्ग को दुरुस्त किया जा रहा है। यात्रा को सकुशल संपन्न कराने में आईटीबीपी भी सहयोग करेगी। इसको लेकर पिथौरागढ़ जिला प्रशासन की संबंधित सुरक्षा एजेंसियों के साथ बैठक में चर्चा हो चुकी है।

95 किमी चलना पड़ता था पैदल

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दिल्ली से शुरू होने वाली इस धार्मिक यात्रा पर जाने के लिए पहले यात्रियों को धारचूला के घट्टाबगड़ से लिपुलेख तक लगभग 95 किमी पैदल चलना होता था। पहले दिन धारचूला से गाला, दूसरे दिन बूदी, तीसरे दिन गुंजी, चौथे दिन नाबी, पांचवें दिन वापसी गुंजी, छठे दिन कालापानी, सातवें दिन नाभीढांग, आठवें दिन तकलाकोट, नौवें दिन चीन के दारचीन होते हुए छह दिन कैलाश दर्शन और मानसरोवर की परिक्रमा करने के बाद भारत लौटते थे। धारचूला से 17 दिन जबकि दिल्ली से कुल 21 दिन की यात्रा होती थी। अब भारत लिपुलेख तक सड़क बना चुका है। चीन ने पहले ही अपनी सीमा पर पक्की सड़क बना ली थी। लिपुलेख तक सड़क बनने के बाद कैलाश मानसरोवर जाने के लिए यात्रियों को पैदल नहीं चलना पड़ेगा और यात्रा कम समय में पूरी हो जाएगी।

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर कब-कब लगा ब्रेक
कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदुओं की पवित्र यात्रा है। जीवन में एक बार भगवान शिव के निवास स्थल पहुंचकर दर्शन करने की इच्छा हर हिंदू की होती है। वर्ष 1962 से पहले भारत से श्रद्धालु बिना रोकटोक सदियों से चली आ रही इस धार्मिक यात्रा पर जाते थे। भारत-चीन युद्ध के बाद यह यात्रा 19 साल तक यात्रा बंद रही। दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार के बाद वर्ष 1981 में यात्रा दोबारा शुरू हुई। कुमाऊं मंडल विकास निगम ने इस यात्रा का संचालन किया। वर्ष 2019 तक लगातार यात्रा का संचालन हुआ। चीन के साथ सीमा विवाद और कोरोना काल के चलते यात्रा का संचालन बंद रहा।

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अब यात्रा टनकपुर होते हुए पहुंचेगी धारचूला
नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय में कैलाश मानसरोवर यात्रा के संबंध में आयोजित बैठक में चर्चा हो चुकी है। पहले यह यात्रा काठगोदाम, अल्मोड़ा होते हुए धारचूला पहुंचती थी। अब यह टनकपुर से चंपावत और पिथौरागढ़ नगर होते हुए धारचूला जाएगी। सूत्रों के अनुसार इस वर्ष कैलाश यात्रियों के पांच दल होंगे। प्रत्येक दल में 50-50 यात्री शामिल होंगे। दिल्ली से रवाना होने के बाद यात्री दलों को टनकपुर और धारचूला में ठहराया जाएगा। धारचूला से दल गुंजी रवाना होगा। गुंजी में यात्री दो दिन ठहरेंगे। यहां पर स्वास्थ्य परीक्षण होगा और यात्रा के संबंध में ब्रीफिंग होगी। इसके बाद नाभीढांग में रात्रि विश्राम के बाद यात्री चीन के तकलाकोट में प्रवेश करेंगे। यात्रा पूरी कर लौटने के बाद दल बूंदी पड़ाव से पर्यटक आवास गृह चौकोड़ी पहुंचेगा और फिर अगले दिन अल्मोड़ा। अल्मोड़ा में रात्रि विश्राम के बाद दूसरे दिन यात्री दिल्ली रवाना होंगे।

कैलाश मानसरोवर यात्रा की तैयारियां की जा रही हैं। इस वर्ष भारी बर्फबारी के कारण ग्लेशियर आने से कुछ स्थानों पर सड़क क्षतिग्रस्त हुई है। सड़क को दुरुस्त करने के निर्देश संबंधित एजेंसी को दिए गए हैं। केएमवीएन के पर्यटक आवास गृहों में यात्री ठहरेंगे। सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने को कहा गया है। यात्रा को सकुशल संपन्न कराने के लिए आईटीबीपी का भी सहयोग लिया जाएगा। - विनोद गोस्वामी, डीएम, पिथौरागढ़

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