पांच साल बाद शुरू होने जा रही कैलाश मानसरोवर यात्रा इस बार सुगम होगी। कैलाश यात्री सड़क मार्ग से धारचूला से महज पांच घंटे में गुंजी पहुंच जाएंगे। यात्रियों की सुविधा के लिए प्रशासन की ओर से सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त की जा रही हैं।
तिब्बत स्थित कैलाश मानसरोवर की यात्रा हिंदुओं की प्रमुख धार्मिक यात्रा है। चीन के साथ सीमा विवाद और कोरोना के चलते यह यात्रा बंद हो गई थी। पांच साल बाद यह यात्रा फिर से शुरू होने जा रही है। विशेष यह है कि लिपुलेख तक सड़क बन जाने से इस बार कैलाश यात्रियों को पैदल नहीं चलना पड़ेगा और पूरी यात्रा वाहन से ही तय कर सकेंगे। यात्रियों को कुमाऊं मंडल विकास निगम के पर्यटक आवास गृहों में ठहराया जाएगा। सड़क मार्ग को दुरुस्त किया जा रहा है। यात्रा को सकुशल संपन्न कराने में आईटीबीपी भी सहयोग करेगी। इसको लेकर पिथौरागढ़ जिला प्रशासन की संबंधित सुरक्षा एजेंसियों के साथ बैठक में चर्चा हो चुकी है।
95 किमी चलना पड़ता था पैदल
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर कब-कब लगा ब्रेक
कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदुओं की पवित्र यात्रा है। जीवन में एक बार भगवान शिव के निवास स्थल पहुंचकर दर्शन करने की इच्छा हर हिंदू की होती है। वर्ष 1962 से पहले भारत से श्रद्धालु बिना रोकटोक सदियों से चली आ रही इस धार्मिक यात्रा पर जाते थे। भारत-चीन युद्ध के बाद यह यात्रा 19 साल तक यात्रा बंद रही। दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार के बाद वर्ष 1981 में यात्रा दोबारा शुरू हुई। कुमाऊं मंडल विकास निगम ने इस यात्रा का संचालन किया। वर्ष 2019 तक लगातार यात्रा का संचालन हुआ। चीन के साथ सीमा विवाद और कोरोना काल के चलते यात्रा का संचालन बंद रहा।
कैलाश मानसरोवर यात्रा की तैयारियां की जा रही हैं। इस वर्ष भारी बर्फबारी के कारण ग्लेशियर आने से कुछ स्थानों पर सड़क क्षतिग्रस्त हुई है। सड़क को दुरुस्त करने के निर्देश संबंधित एजेंसी को दिए गए हैं। केएमवीएन के पर्यटक आवास गृहों में यात्री ठहरेंगे। सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने को कहा गया है। यात्रा को सकुशल संपन्न कराने के लिए आईटीबीपी का भी सहयोग लिया जाएगा। - विनोद गोस्वामी, डीएम, पिथौरागढ़