कैलास मानसरोवर यात्रा 2015 का समापन हो गया है। अंतिम और 18वें दल के यात्री सोमवार को दोपहर बाद आईटीबीपी सातवीं वाहिनी मुख्यालय मिर्थी से जागेश्वर धाम होते हुए दिल्ली को लौट गए हैं। आईटीबीपी वाहिनी मुख्यालय में सेनानी केदार सिंह रावत ने यात्रा सकुशल संपन्न हो जाने पर खुशी जताई और यात्रियों को मुबारकबाद दी।
अंतिम दल में कुल 46 यात्री शामिल थे, लेकिन चार यात्री निजी काम के कारण धारचूला से सीधे दिल्ली को रवाना हो गए। आज दोपहर बाद 42 यात्री आईटीबीपी वाहिनी मुख्यालय पहुंचे थे। सेनानी ने कहा कि इस बार सौभाग्य से किसी भी यात्री दल के साथ किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आई। हर दल ने अपनी यात्रा निर्धारित शेड्यूल के अनुसार की। सिर्फ एक महिला यात्री की लिपुलेख के पास बीमारी के कारण मौत हुई थी। इसके अलावा किसी भी यात्री के साथ कोई दिक्कत पेश नहीं आई। अंतिम दल के लायजन आफीसर राममेहर सिंह ने कहा कि इतनी जटिल यात्रा को आईटीबीपी के सहयोग के बिना पूरा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सभी यात्रियों ने ओम पर्वत, मानसरोवर झील, कैलास पर्वत के शानदार दर्शन किए। यात्रियों ने दोपहर भोजन मिर्थी में किया। उसके बाद सीधे टीआरसी पिथौरागढ़ पहुंचे। वहां प्रबंधक दिनेश गुरुरानी ने यात्रियों का स्वागत किया और मानसरोवर स्मृति वन में पौधे रोपे। यात्री शाम को जागेश्वर को रवाना हो गए।