प्रदेश सरकार ने जगह-जगह राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) तो खोल दिए, लेकिन पर्याप्त सुविधाएं मुहैया नहीं कराईं, जिससे बेरोजगारों को रोजगार मिलने के बजाए समय और पैसा ही बर्बाद हो रहा है। यही हाल है अक्तूबर-2014 में खुले गौरीहाट आईटीआई का। यहां एकमात्र वेल्डर ट्रेड है। साल भर बाद भी प्रेक्टिकल की सुविधा नहीं होने के कारण यहां थ्योरी क्लास ही लगती है।
गौरीहाट आईटीआई में आसपास के गांवों के 21 छात्रों ने प्रवेश लिया है। किराए के मकान में चल रहे इस संस्थान में सिर्फ एक शिक्षक तैनात हैं। प्रेक्टिकल के लिए उन्हें 22 किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ जाना पड़ता है। आईटीआई के भवन में बिजली का कनेक्शन भी नहीं है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यहां तैनात शिक्षक को पांच महीने से वेतन नहीं मिल पाया है। जिस भवन में संस्थान चल रहा है उसके मालिक को भी किराए का भुगतान नहीं हो पाया है। गरीब घरों के बच्चों ने अपनी व्यावसायिक क्षमता के विकास के लिए संस्थान में प्रवेश तो ले लिया, लेकिन अब उन्हें निराशा ही हाथ लगी है।
भवन के लिए जमीन का चयन
पिथौरागढ़ आईटीआई के प्रधानाचार्य वीके चौधरी ने बताया कि आईटीआई के भवन के लिए 14 नाली जमीन चयनित हो गई है। भवन निर्माण का प्रस्ताव शासन को गया है। धन मिलते ही भवन निर्माण का काम शुरू कर दिया जाएगा। मकान मालिक के किराए के भुगतान के लिए भी शासन से पैसा मांगा गया है। वह कहते हैं कि जल्द ही समस्याओं का समाधान हो जाएगा।