तल्ला जोहार क्षेत्र में अब नशेड़ी जंगलों के दुश्मन बन गए हैं। बुधवार को थल मेले से लौट रहे कुछ नशेड़ियों ने भैंसखाल वन पंचायत के जंगल में आग लगा दी। महिलाओं की सक्रियता से देर रात तीन घंटे के बाद आग पर काबू पाया जा सका। वहीं, वन विभाग के कर्मचारी आग लगने की सूचना मिलने के बाद भी घटनास्थल पर नहीं पहुंचे।
वन पंचायत भैंसखाल के बारातोली तोक से लगे जंगल में बुधवार शाम 6 बजे अचानक आग लग गई। ग्रामीणों का कहना है कि यह आग थल मेले से घर लौट रहे कुछ नशेड़ियों ने लगाई है। जंगल से उठते धुएं को देख भैंसखाल की प्रधान चंद्रकला दानू, उप प्रधान अनीता देवी के नेतृत्व में गांव की 35 महिलाएं जंगल को रवाना हुई। महिलाओं के एक किमी खड़ी चढ़ाई चढ़कर घटनास्थल पहुंचने तक आग ने प्रचंड रूप ले लिया था। तब तक गर्मी बढ़ने और तेज हवा चलने के कारण आग आधे घंटे में ही तीन हेक्टेयर क्षेत्र में फैल चुकी थी। महिलाओं की कड़ी मशकत के बाद रात करीब 9 बजे आग पर काबू पाया गया।
प्रधान ने आग लगने की सूचना नाचनी में तैनात वन बीट अधिकारी रमेश लोधियाल को दी, जिस पर वन बीट अधिकारी ने घटनास्थल बारातोली में रहने वाले विभागीय कर्मचारी प्रताप सिंह को घटनास्थल पहुंचकर आग बुझाने को कहा, लेकिन प्रताप सिंह आग बुझाने नहीं गए। वहीं अन्य महिलाओं ने बारातोली के एक दर्जन परिवारों को आग बुझाने के लिए सहयोग मांगा, लेकिन किसी भी परिवार से कोई सदस्य मदद के लिए नहीं आया।
प्रधान का कहना है कि जंगल बारातोली के नजदीक होने पर भी कोई आग बुझाने नहीं आए, जबकि बारातोली के लोग इसी जंगल से लकड़ी, घास का लाभ उठाते हैं। कहा कि इन जंगल में बांज, काफल, फल्यांट के साथ ही कई चारा प्रजाति के पेड़ हैं, जिन्हें नुकसान पहुंचा है। इस जंगल के तलहटी में पानी के कई स्रोत हैं, जंगल को नुकसान होने के साथ ही पानी के स्रोतों पर भी बुरा असर पड़ेगा। आग लगने की घटना को लेकर बृहस्पतिवार को महिलाओं ने बैठक कर नशेड़ियों को चिन्हित करते हुए पुलिस और वन विभाग में प्राथमिकी दर्ज करने का निर्णय लिया है। कहा कि गांव की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले अराजक तत्वों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। बैठक में कमला देवी, मंजू देवी, दीपा देवी, खीमा देवी, नारायणी देवी, खिमुली देवी, कलावती देवी, ज्योति देवी, कमला देवी, नैन सिंह, दरपान सिंह, राजवीर सिंह आदि ग्रामीण मौजूद थे।