नो फायर जोन घोषित घनधूरा के जंगलों में इस सीजन में तीसरी बार आग लग गई है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शिकारी और शरारती तत्वों ने यह आग लगाई है। घनधूरा के जंगल में घुसकर आग लगाने वालों को पकड़ने के लिए वन विभाग ने टीम का गठन कर दिया है। अब ऐसे तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का फैसला लिया गया है।
घनधूरा जंगल को बेशकीमती वनस्पतियों और जंगली जानवरों की मौजूदगी के कारण नो फायर जोन घोषित किया गया है। घनधूरा में दुर्लभ कस्तूरी मृग भी पाया जाता है। इसके अलावा कई प्रकार के जीव, पक्षी इस जंगल में मिलते हैं। इन जीवों की मौजूदगी के कारण ही अक्सर यह जंगल आग की घटनाओं की चपेट में आता है। बताया गया कि शिकारी जंगली जानवरों को मारने के लिए आग लगा देते हैं, फिर उनको घेरकर मारते हैं। इस बार घनधूरा के ऊपरी हिस्से में आग लगाई गई है। इससे साफ जाहिर है कि शिकारी घनधूरा की पहाड़ी के टॉप तक पहुंच गए हैं।
वन रेंजर केआर टम्टा ने बताया कि आग लगाने वालों को पकड़ने के लिए वन दरोगा गोपाल राम के नेतृत्व में पांच वनकर्मी और ग्राम अग्नि सुरक्षा समिति के सदस्यों की टीम बनाई गई है। यह टीम मौके पर जाकर आग लगाने वालों का चिन्हीकरण करेगी। स्थानीय लोगों से ऐसे तत्वों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
जंगलों की आग से वातावरण में धुंध
नाचनी (पिथौरागढ़)। ऊपरी रामगंगा घाटी के अधिकांश जंगल एक बार जल चुके हैं। अभी चीड़ की पत्तियां (पिरूल) के गिरने का क्रम जारी है। इस कारण फिर से जंगलों में आग का खतरा मंडरा रहा है। उधर, थल के नजदीक हजेती के जंगल में लगी आग नियंत्रित हो गई है। अस्कोट के आसपास के जंगलों में लगी आग से पूरे वातावरण में धुंध छाई है। वन विभाग ने जंगलों की आग को नियंत्रित करने के लिए सड़क किनारे गिरे पिरूल को हटाने का काम बृहस्पतिवार को भी जारी रखा।