झूलाघाट से बलतड़ी को जाने वाली सड़क
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सीमा की सुरक्षा के लिए बनी झूलाघाट-बलतड़ी सड़क पर दस साल से डामर नहीं हुआ है। सामरिक महत्व की सड़क पर प्रतिदिन दर्जनों वाहन चलते हैं। डामर न होने से 15 मिनट के सफर में एक घंटा लग रहा है।
महाकाली नदी के किनारे बन रही टनकपुर-जौलजीबी सड़क से सटी झूलाघाट से बलतड़ी तक सड़क वर्ष 2008 में बन गई थी। सड़क से कानड़ी, सीमू, सप्तड़ी, बलतड़ी, तड़ीगांव और ध्याण की 20 हजार की आबादी जुड़ी है। तीन किमी इस सड़क का दो किमी हिस्सा तीन वर्ष पहले ही बना है। एक हिस्सा गांव के लोगों ने श्रमदान से बनाया था। विधायक विशन सिंह चुफाल ने विधायक निधि से 2 लाख देकर दो किमी सड़क बनवाई।
इस समय लोक निर्माण विभाग पिथौरागढ़ सड़क की देखरेख कर रहा है, लेकिन डामर नहीं होने से सड़क पर चलना मुश्किल हो रहा है। इस कच्ची सड़क पर धूल का गुबार उड़ता रहता है। सुरक्षा दीवार नहीं बनने से बरसात में मलबा आने से सड़क बंद रहती है। मरीजों को डोली पर झूलाघाट तक लाना पड़ता है। युवक मंगल दल अध्यक्ष सुरेश भट्ट ने विभाग और सरकार की बेरुखी के खिलाफ आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
सड़क टनकपुर-जौलजीबी के एलायमेंट में भी है। डामरीकरण का प्रस्ताव शासन को गया है। जैसे ही शासन से स्वीकृति मिलती है, सड़क पर डामरीकरण सहित अन्य काम शुरू हो जाएंगे।
-नवीन जोशी, अधिशासी अभियंता, लोनिवि पिथौरागढ़