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रहो घर जानकी मानो हमारी...

Sat, 22 Oct 2016 11:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़/अस्कोट
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डीडीहाट की रामलीला में राम को रिझाने का प्रयास करती सूर्पनखा - फोटो : अमर उजाला
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जिला मुख्यालय के नजदीक वड्डा की रामलीला में लक्ष्मण शक्ति का मंचन किया गया। अस्कोट और डीडीहाट में रामलीला जारी है।
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अस्कोट की रामलीला में राजा दशरथ द्वारा राम को 14 वर्ष का वनवास देने के बाद भगवान राम माता कौशल्या के पास जाकर वन जाने की आज्ञा मांगते हैं। सीता माता भगवान राम से वन जाने की जिद करती हैं। भगवान राम कहते हैं-रहो घर जानकी मानो हमारी, बहुत दुख पाओगी जंगल में प्यारी, थकेंगे पैर चलते-चलते वन में, नहीं मिलती वहां कोई सवारी। सीता माता वन जाने की जिद पर अड़ी रहती हैं। भगवान राम उन्हें साथ ले जाने पर राजी हो जाते हैं। वन जाने का समाचार सुनकर लक्ष्मण क्रोधित हो जाते हैं। कहते हैं-सुनो भ्राता पिता हैं वृद्ध भारी, उन्होंने लाज अपने सिर से टारी। रहेंगे कैसे वन में वनचरों में, न कुल रीति भी इसमें विचारी। भगवान राम लक्ष्मण समझाते हैं। मुख्य अतिथि लोनिवि के अधिशासी अभियंता एबी कांडपाल, विशिष्ट अतिथि सहायक अभियंता बीएस बोरा, रमेश ओझा थे। 
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डीडीहाट की रामलीला में सूर्पणखा के नाक, कान कटने के बाद खर-दूषण सेना सहित पंचवटी आते हैं। भगवान राम के हाथों सभी मारे जाते हैं। सूर्पणखा नाक, कान काटने के साथ ही खर-दूषण वध की सूचना रावण को देती है। रावण मामा मारीच को मृग के वेश में पंचवटी भेजता है। सीता माता की इच्छा पर भगवान राम मृग को मारने जाते हैं। रावण ब्राह्मण वेश में सीता माता का हरण कर लेता है। गिद्धराज जटायु रावण से युद्ध करते हैं। रावण उनको घायल कर देता है। राम, लक्ष्मण सीता माता की खोज में निकल जाते हैं। थानाध्यक्ष गणेश सिंह सामंत ने रामलीला में जागरूकता अभियान के दौरान साइबर क्राइम की जानकारी दी और इससे सचेत रहने की आवश्यकता बताई।
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