एनएचपीसी के संविदा मजदूरों और प्रबंधन के बीच टकराव बढ़ गया है। संविदा मजदूर संगठन 15 सितंबर को दोबाट के पास हुई वाहन दुर्घटना में मरे संविदा मजदूर दान सिंह के परिजनों को दस लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं, लेकिन एनएचपीसी की धौलीगंगा परियोजना के प्रबंधकों ने इस मांग को हल करने में असमर्थता जता दी है। बुधवार को भारी संख्या में मजदूर महाप्रबंधक वीके सिंह को ज्ञापन देने के लिए पहुंचे, लेकिन महाप्रबंधक वीके सिंह ने ज्ञापन लेने से इनकार कर दिया। आक्रोशित मजदूरों ने कुछ देर तक धारचूला-तवाघाट मार्ग पर तपोवन के पास जाम लगाया। बाद में सभी मजदूर एनएचपीसी के गेट के बाहर धरने पर बैठ गए।
मजदूरों का कहना है कि प्रबंधकों ने मुआवजे की मांग उठाने पर संगठन के अध्यक्ष उदय सिंह को काम से हटा दिया। अब भी मांग नहीं मानी जा रही है। प्रबंधकों ने मुआवजे का एनएचपीसी से भुगतान करने में असमर्थता जताते हुए कहा कि कुछ राशि चंदे के रूप में दी जा सकती है। संविदा मजदूरों ने कहा है कि चार अक्तूबर तक मृतक के परिजनों को मुआवजे का भुगतान नहीं होता तो पांच अक्तूबर से बेमियादी हड़ताल शुरू हो जाएगी। फिलहाल मामला नहीं सुलझ पाया है। संविदा मजदूर संगठन का कहना है कि एनएचपीसी के अधिकारी लगातार उत्पीड़न का रास्ता अपना रहे हैं। स्थानीय लोगों को सिर्फ संविदा पर काम में रखा जाता है। इस मौके पर संविदा कर्मचारी संगठन के उपाध्यक्ष अनूप सिंह, महासचिव विनोद कुमार, नरेंद्र सिंह, लक्ष्मण होरा, कविराज सिंह, आशा देवी, कृष्णा देवी, सुनीता देवी, विमला देवी, हीरा देवी, शांति देवी, जयंती देवी समेत तमाम मजदूर थे।