उच्च हिमालयी क्षेत्र में रात के समय आग बुझाने का प्रयास करते आईटीबीपी के जवान
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चीन सीमा से सटे उच्च हिमालयी क्षेत्र के गर्ब्यांग और छियालेख के बीच चंपूनाला क्षेत्र के जंगलों में लगी आग पर आईटीबीपी के जांबाजों ने काबू पा लिया है। जवानों को शून्य से दस डिग्री नीचे चल रहे तापमान में 11 हजार फुट की ऊंचाई तक आग पर काबू पाने के लिए जाना पड़ा। इस काम में आईटीबीपी के 55 जवान रातदिन जुटे रहे। आग पर नियंत्रण होने के बाद मंगलवार को आईटीबीपी सातवीं वाहिनी मुख्यालय ने बाकायदा प्रेस नोट जारी कर इसकी जानकारी दी है। उधर, वन विभाग के चार स्थानीय कर्मचारी ही मौके पर पहुंचे। धारचूला से भेजी गई टीम अभी रास्ते में ही है।
आईटीबीपी के सेनानी महेंद्र प्रताप ने बताया कि गुंजी, गर्ब्यांग एवं छियालेख चौकी से उपसेनानी महेंद्र चंद मीणा के नेतृत्व में छह अधीनस्थ अधिकारियों और 48 जवानों की टीम ने रात दिन आग पर काबू पाने का प्रयास किया। आग को नियंत्रित करने के लिए आईटीबीपी के जवानों ने कंट्रोल बर्निंग का सहारा लिया और जगह-जगह आग पर काबू पाने के लिए रेखाएं तैयार की। आईटीबीपी के अग्निशमन दस्तों ने आग पर काबू पाने के लिए पूरी तकनीक का इस्तेमाल किया। वन विभाग की टीम यदि मौके पर पहुंच भी जाती तो उसके पास इतनी मानव शक्ति और संसाधन नहीं हैं।
सेनानी ने बताया कि अब आग पूरी तरह नियंत्रित हो गई है। अलबत्ता आग से छोटे पौधों और वनस्पति को नुकसान पहुंचा है। आईटीबीपी के जवान लगातार निगरानी रख रहे हैं। इधर, वन रेंजर राजेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि गुंजी और गर्ब्यांग में तैनात कुछ कर्मचारियों को आग लगने की घटना के दिन 14 जनवरी को ही मौके पर भेजा गया और दस कर्मचारियों की एक टीम धारचूला से रवाना की गई है। यह टीम मौके पर नहीं पहुंच पाई है। आईटीबीपी के माध्यम से आग पर नियंत्रण होने की जानकारी वन विभाग को भी मिल चुकी है।
प्रतिकूल मौसम के कारण मंडराया खतरा
उच्च हिमालयी क्षेत्र में इस बार हिमपात नहीं हुआ है। इस कारण जमीन की नमी लगातार कम हो रही है। शिकारी इसी मौके का फायदा उठाने में लगे हैं। आशंका जताई जा रही है कि नेपाल के वन्यजीव तस्कर आग लगा रहे हैं। हालांकि अब तक ऐसा कोई भी व्यक्ति क्षेत्र में पकड़ में नहीं आया है। इस आशंका को इसलिए भी बल मिलता है, क्योंकि इस समय उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों में लोग नहीं रहते। सभी गांवों से लोग मौसमी प्रवास पर घाटी वाले इलाकों में गए हुए हैं।