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इस्राइली तकनीक की भूमिगत योजना से हो रही सिंचाई

Wed, 19 Jul 2017 10:42 PM IST
कालिका रावल/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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भूमिगत योजना से नाचनी के भैंसखाल में हो रही सिंचाई - फोटो : अमर उजाला
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नाचनी क्षेत्र के भैंसखाल ग्राम पंचायत में ग्राम प्रधान ने इस्राइली तकनीक से भूमिगत सिंचाई योजना का निर्माण कर कम पानी वाले स्थानों को सिंचित करने का रास्ता खोल दिया है। ग्राम प्रधान चंद्रकला दानू ने परियोजना में भूमिगत गूल के निर्माण का प्रावधान न होने के बावजूद अपनी जिद पर भूमिगत गूल का निर्माण कराया। परियोजना के तहत 100 मीटर कंकरीट गूल के लिए एक लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत हुई थी। इसी रकम में करीब 200 मीटर भूमिगत गूल बन गई है। खेतों में बिछाई गई पाइप लाइन से तीन हेक्टेयर भूमि सिंचित हो रही है। यह तकनीक ग्राम्या के अधिकारियाें को काफी पसंद आई है। अब कम पानी वाले स्थानों पर ग्राम्या इस तकनीक का उपयोग करेगी।
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नाचनी क्षेत्र में एकीकृत जलागम परियोजना (ग्राम्या) की जलागम फेस 2 परियोजना संचालित की जा रही है। वर्ष 2016 में ग्राम्या के तहत ग्राम पंचायत में एक लाख रुपये की लागत की गूल बननी थी। गांव के खबरिया जलस्रोत से 100 मीटर लंबी कंकरीट गूल बनाई जानी थी। भैंसखाल ग्राम पंचायत की प्रधान चंद्रकला दानू (जिनका परिवार प्रगतिशील किसानों में शुमार है) इस्राइली तकनीक से भूमिगत सिंचाई योजना बनाने पर अड़ गईं। इस तकनीक के तहत स्रोत से खेत तक भूमिगत पाइपों के जरिए पानी लाया जाता है। विभाग के लोगों की असहमति के बावजूद ग्राम प्रधान ने भूमिगत सिंचाई योजना बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए। पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों से सिंचाई तकनीक की जानकारी हासिल करने के बाद स्रोत का पानी 18,000 लीटर के टैंक में डाला गया। टैंक से खेतों तक 50 एमएम के हाइडेंसिटी प्लास्टिक पाइप (एचडीपी पाइप) की एक मीटर गहरी भूमिगत लाइन बिछाई गई। भूमिगत लाइन से खेतों के लिए 25 मिमी, 20 मिमी के कनेक्शन खेतों के लिए दिए गए। खेतों में पानी खोलने, बंद करने के लिए गेटवॉल लगाए गए हैं।

ग्राम प्रधान चंद्रकला दानू ने बताया कि बारिश के पानी पर निर्भर रहने वाले ग्राम पंचायत के मल्ला खोली और तल्ला खोली के 25 किसानों ने इस बार तीन हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपाई भूमिगत सिंचाई योजना के पानी से लगाई। कहा कि मुख्य टैंक से प्रेशर के साथ पानी खेतों तक पहुंच रहा है। प्रधान का कहना है कि योजना के टैंक में 18,000 लीटर पानी भरने में चार घंटे का समय लगता है। कहा कि जहां भी कम पानी है, वहां यह तकनीक वरदान साबित हो सकती है। बीते दिनों ग्राम्या के उप परियोजना निदेशक सीबी त्रिपाठी ने योजना का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रधान की पहल की सराहना करते हुए कहा कि अब इस तकनीक को ग्राम्या अपनाएगी।
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लागत भी कम आती है
ग्राम प्रधान चंद्रकला दानू ने कहा कि इस तकनीक में लागत भी कम आती है। सीमेंट की एक मीटर गूल की लागत करीब 1000 रुपये आती है। एचडीपी पाइप से 500 रुपये की लागत से एक मीटर भूमिगत गूल बन जाती है। यही कारण है कि वह 200 मीटर गूल बनाने में सक्षम हुईं। प्रधान कहती हैं कि यह तकनीक सीमेंट की खुली नहरों में होने वाली टूट-फूट से निजात दिलाती है। सिंचाई विभाग को इस तकनीक का प्रयोग करना चाहिए।

सब्जी उत्पादन में पानी का उपयोग किया जाएगा 
ग्राम्या के उप परियोजना निदेशक सीबी त्रिपाठी भैंसखाल के सफल प्रयास से इतने उत्साहित हैं कि वह कहते हैं कि कम पानी वाले स्थानों पर भूमिगत सिंचाई योजना की इस्राइली तकनीक का प्रयोग सब्जी उत्पादन में किया जाएगा। सब्जी बेचने के लिए बाजार उपलब्ध कराया जाएगा।

रखरखाव के लिए कसी कमर
भैंसखाल की भूमिगत सिंचाई योजना के रखरखाव के लिए ग्राम पंचायत के लोगों ने एक समिति का गठन किया है। फिलहाल सभी 25 किसानों ने 500-500 रुपये की धनराशि रखरखाव मद के लिए समिति को दिए हैं। रबी और खरीफ की फसल में बिलिंग की जाएगी। समिति पानी का कर वसूल करेगी।
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