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पुनर्वास के बिना गांव न छोड़ने का ऐलान

Wed, 19 Jul 2017 10:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अस्कोट
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पंचेश्वर के डूब क्षेत्र में पड़ने वाला तालेश्वर, कानड़ी का इलाका - फोटो : अमर उजाला
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पंचेश्वर बांध से प्रभावित होने वाले गांवों के लोगों की चिंताएं भी सामने आने लगी हैं। प्रभावित गांवों के लोग बांध निर्माण के हो-हल्ले के बीच डूब क्षेत्र का सर्वे न होने पर सवाल खड़े कर रहे हैं। लोगों को आशंका है कि कहीं सरकार दशकों पहले किए गए सर्वे के अनुसार ही बांध का निर्माण न करा दे। लोगों ने बिना पुनर्वास किए बांध का निर्माण न होने देने और गांव न छोड़ने का ऐलान किया है।
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6000 मेगावाट बिजली पैदा करने के लिए भारत और नेपाल के बीच बनाए जा रहे पंचेश्वर बांध से बलतड़ी, पंतसेरा, कानड़ी, तालेश्वर, अमतड़ी, रणुवा, ड्योड़ा, चकद्वारी, सुनखोली, बगड़ीगांव, द्वालीसेरा, घिंघरानी, फल्याटी गांव, स्यालतड़, हंसेश्वर, तीतरी, बगड़ीहाट, सिलौनी आदि गांव प्रभावित होंगे। लोग अपने पूर्वजों की जमीन, घर, जंगल, मंदिर सभी के डूब जाने की आशंका से मायूस हैं। लोगों को यह भी डर है कि सरकार कहीं उनके हितों की रक्षा किए बगैर ही उनका पुनर्वास न कर दे।

द्वालीसेरा के प्रधान पद्म सिंह, ड्योड़ा की प्रधान मंजू देवी, पंतसेरा की प्रधान हेमलता देवी, तीतरी के प्रधान मान सिंह, बगड़ीहाट के प्रधान राम सिंह बिष्ट, सिलौनी की प्रधान माधवी देवी का कहना है कि 30-40 साल पहले पंचेश्वर बांध के लिए सर्वे हुआ था। डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों में निशान लगाए गए थे। आज जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंचेश्वर बांध की खुद निगरानी कर रहे हैं तो कम से कम डूब क्षेत्र का नए सिरे से सर्वे तो होना चाहिए। डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों के लिए सरकार के पास क्या योजना है, इसका खुलासा होना चाहिए। कहा कि पुनर्वास होने के बाद ही वह लोग गांव खाली करेंगे।
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बगैर जमीन वाले अधिक परेशान 
पंचेश्वर बांध से भूमिधर तो परेशान हैं ही, वह लोग अधिक परेशानी में आ गए हैं, जिन लोगों ने नदी के आसपास मकान बनाए हैं, लेकिन वह भूमि उनके नाम दर्ज नहीं है। नदी के किनारे जमीन कब्जा कर बैठे लोगों को आशियाना छिन जाने की चिंता सता रही है।
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