टाकुला गांव में शौचालय बनाने के लिए खोदे गए गड्ढे
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नेपाल सीमा से लगे मूनाकोट ब्लॉक के टाकुला सहित कई गांवों में शौचालय बनाए बिना ग्रामश्री पुरस्कार मिलने के मामले को जिलाधिकारी डा. रंजीत सिन्हा ने गंभीरता से लिया है। इस मामले की जांच होगी और जो लोग भी इसमें लिप्त पाए जाएंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अमर उजाला के 21 फरवरी के अंक में ‘शौचालय बने नहीं, गांव को मिल गया ग्रामश्री पुरस्कार’ शीर्षक से खबर छपी थी। इसमें खुलासा किया गया था कि मूनाकोट विकासखंड के टाकुला गांव में एक भी शौचालय नहीं है और गांव के लोग आज भी खुले में शौच करने जाते हैं। गांव के 12 परिवारों में से 11 के पास शौचालय नहीं है, जबकि पूरी ग्राम पंचायत को ओडीएफ (संपूर्ण शौचालय युक्त गांव) घोषित कर दिया है। गांव में शौचालय बनाने के लिए गड्ढे खोदने के बाद लोगों के बैंक में खाते खोले गए हैं। यह गांव सड़क से काफी दूर होने के कारण गड़बड़ी में लिप्त लोगों को यकीन था कि किसी को इसका पता नहीं चल पाएगा।
जिलाधिकारी ने कहा कि यह जांच का विषय है कि गांव में पहले भी जो शौचालय बने थे उनका कैसे भुगतान किया गया और गांव में शौचालय बने बगैर किसकी संस्तुति पर गांव को ओडीएफ घोषित किया गया। इस पूरे प्रकरण की जांच की जाएगी। जो लोग भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस बात का पता लगाया जाएगा कि किसी ने शौचालय के नाम पर फर्जी तौर पर धनराशि प्राप्त तो नहीं की है। टाकुला गांव तड़ीगांव ग्राम पंचायत में आता है। डीएम के आदेश पर टीम गांव रवाना हो गई है। डीएम ने कहा है कि वह खुद भी गांव जाकर स्थिति का पता लगाएंगे।