भारत और नेपाल को जोड़ने वाले अंतरराष्ट्रीय झूलापुल की मरम्मत का काम शुरू हो गया है। हर तीन साल में झूलापुल की मरम्मत की जाती है। इस बार बीएडीपी से पुल की मरम्मत के लिए पांच लाख रुपये मिले हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बार बार लकड़ियों को बदलने के बजाए इसमें अल्युमिनियम की प्लेटें लगाई जानी चाहिए। वह ज्यादा समय तक टिकाऊ भी रहती।
झूलापुल की देखरेख का काम लोनिवि करता है। 2012 में पुल की सभी बल्लियों को बदला गया था। लोनिवि के अधिशासी अभियंता नवीन जोशी ने बताया कि बीएडीपी की मद से इस रिपेयरिंग की जा रही है। उन्होंने कहा अल्युमिनियम की प्लेट लगाने के लिए कोई इस्टीमेट नहीं बना है।
व्यापार संघ अध्यक्ष संजीव जोशी, युवक मंगल दल अध्यक्ष डब्बू गड़कोटी ने कहा है कि रिपेयरिंग का इस्टीमेट फिर से बनाया जाए ताकि एक बार में पक्का काम हो सके। 42 मीटर लंबा यह झूलापुल महाकाली के ऊपर बना है। भारत और नेपाल को जोड़ने वाला सबसे अहम झूलापुल है।