राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर न्यायिक अधिकारियों ने यहां लॉकअप का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि लॉकअप में कोई ऐसी महिला बंदी नहीं है जो गर्भवती है। साथ ही कोई ऐसी महिला भी नहीं मिली जिसके साथ कोई बच्चा हो। दृष्टिहीन बंदी भी नहीं मिला।
जिला जज सिकंद कुमार त्यागी के निर्देश पर विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव रीतेश कुमार श्रीवास्तव ने लॉकअप के निरीक्षण के दौरान प्रशासन और पुलिस को निर्देश दिए कि गर्भवती या बच्चे के साथ वाली महिला बंदी हो तो उसको उचित सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। किसी महिला कैदी के साथ उसका छह वर्ष तक का बच्चा रह सकता है। बच्चे को उसकी मां के साथ विचाराधीन अपराधी की तरह नहीं रखा जाए। इस तरह के बच्चे भोजन, आवास, चिकित्सा, देखभाल, कपड़े, शिक्षा, मनोरंजन की सुविधा के हकदार हैं, यदि कोई गर्भवती लॉकअप में आती है तो उसे प्रसवपूर्व और प्रसव के बाद न्यूनतम सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
यदि किसी बच्चे का जन्म जेल में होता है तो रजिस्टर में उसका यह उल्लेख नहीं होगा कि बच्चे का जन्म जेल में हुआ है। जेल में पैदा हुए बच्चे को नामकरण की सुविधाएं भी दी जाएंगी। न्यायिक अधिकारियों ने बंदियों को उनके विधिक अधिकारों की जानकारी दी। उनको मिलने वाले भोजन, पेयजल, साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान देने को कहा। इस दौरान नायब तहसीलदार जीवन सिंह चौहान, शासकीय अधिवक्ता गंगा सिंह बाफिला, लॉकअप प्रभारी दिनेश बडोला, दीवान सिंह बिष्ट, एमसी जोशीद, प्रकाश पाटनी आदि थे।